बुधवार, 16 दिसंबर 2020

corona jagrukta par kavita- कोरोना - संकट/ सीताराम चौहान पथिक

 corona jagrukta par kavita

कोरोना - संकट ।।

corona- jagrukta- par- kavita
corona jagrukta par kavita

 

कीटाणु बम - विस्फोट हुआ ,

कोरोना - विषाणु का जन्म हुआ

संक्रामक और दुष्ट कीट  ने ,

जग का कोना कोना छुआ

 

अखिल विश्व में त्राहि-त्राहि का ,

निर्मम रौद्र  रूप अपनाया

शान्त और सम्पन्न जगत में ,

लाशों  का  अंबार  लगाया

 

कोरोना  से बचाव   हेतु  ,

जन-जन पर प्रतिबंध  लगे

लॉकडाउन   --सामाजिक दूरी,

रात्रि - कर्फ्यू  प्रतिबंध  लगे 

 

एक वर्ष बीतने पर  अब  ,

थोड़ा - थोड़ा थमता दीखे

इंजेक्शन - वैक्सीन प्रायोगिक

सपने  सब्ज  बाग  सरीखे  ।।

 

दैनिक मज़दूर क्षुद्र व्यापारी ,

सरकारी काम अधर में लटके

अर्थ - व्यवस्था चौपट हो गई ,

अस्पताल में  रोगी  भटके ।।

 

धीरे- धीरे स्थिति सुधर रही ,

जीवन  सामान्य  सा लगता है

संकट की घड़ियां  बीत  गयी ,

कोरोना अन्तिम विदाई लगता है

 

सचेत सदा ही  रहना भाइयों ,

आक्रमण अचानक कर सकता है

रहो स्वच्छ और मास्क लगाओ ,

सामाजिक दूरी से कोविद मरता है ।।

 

सावधानी का  मूल मंत्र है ,

सरकारी आदेशों का पालन

स्वस्थ  और  नीरोग रहोगे  ,

पथिक स्वयं पर हो अनुशासन ।।

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सीताराम चौहान पथिक

नई दिल्ली 

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