1. किस्मत
(anjali sharma hindi poetry)

anjali sharma hindi poetry

" हाय! ये किस्मत कैसी तेरी,
मजबूरी पत्थर तोड़ने की।
गरमी तपती कंचन काया,
ठंड नहीं कुछ ओढ़ने की।
तु भी थी कभी नन्ही सी,
किसी माली के गुलशन की परी।
माँ ने चुमा था हाथों को,
हाथ पकड़ पिता के चली।
बड़ी हुई बेदर्द जहाँ में,
फूल की जगह काँटे राह में।
खन-खन करती चूड़ी थी कभी,
औजार थमा अब उसी बांह में।
पेट की ज्वाला बूझे कभी तो,
सोचे फटे वसन को जोड़ने की।
हाय ये किस्मत कैसी तेरी,
मजबूरी पत्थर तोड़ने की।
2.किसान~मितान
" सुबह बदल गयी,
शाम बदल गयी,
दिन बदल गया,
रात बदल गयी,
पर जो न बदला,
वो किस्मत हमारी है।
मौसम बदला,
सरकारें बदली,
पर जो न बदला,
वो हालात हमारी है।
नियम बदले,
कानून बदला,
पर जो न बदला,
वो हिम्मत हमारी है।
महकमा बदला,
हुक्मराने बदले,
कितने ही;
फरमानें बदले,
पर जो न बदला,
वो ताकत हमारी है।
न सर्दी की ठिठुरन से,
न गर्मी की तपिश से,
न बादल के गरजने से,
न ही तेज बारिश से,
जो टूटती नहीं,
वो हिम्मत हमारी है।
कड़कती हो बिजली,
चाहे चलती हो आँधियां,
डँटे रहते हैं खेतों में,
चाहे कहीं भी आशियां हो।
फटे-पुराने पहने रहकर,
कपास उगाते हैं,
भूखे-प्यासे पेट हो फिर भी,
अनाज उगाते हैं।
पसीना बहाकर खेतों में,
मेहनत से फसल उगाते हैं,
पेट काटकर अपना हम,
दुनिया को खिलाते हैं।
हम सीधे-सादे, भोले-भाले,
सच्चे एक इंसान हैं,
धरती हमारी माता है,
अन्न ही भगवान है।
दुनिया की दौलत तुम रख लो,
हम पशुओं को धन कहते हैं,
तुम दुनिया के कर लो सैर-सपाटे
हम मस्त इसी में रहते हैं।
एक लाठी और हल,
यही मेरा औजार है,
फौलाद सा सीना रखता हूँ,
बाकी सब बेकार है।
मेहनत से फसल उगाता हूं,
फिर सबको खिलाता हूं,
पहली रोटी गौमाता को,
चिड़िया कौवा कुत्ते बिल्ली,
भूखे गरीब जरुरत मंदों में,
अन्न मैं लूटाता हूँ ।
घर आ जाये मेहमान कोई,
पकवान बना खिलाता हूँ,
दान लूटाता हूं अन्न का,
तब अन्नदाता कहलाता हूँ।
न झुकता हूँ न डरता हूँ,
मैं अपने में रहता हूँ,
सच्चा एक इंसान हूँ,
मैं एक किसान हूँ,
सबका मितान हूँ।
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अंजली शर्मा बिलासपुर ( छत्तीसगढ़ ). |


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