शुक्रवार, 11 दिसंबर 2020

algoza bagheli kavita- चिन्ना बाबा का अलगोजा/नरेन्द्र सिंह बघेल

 algoza bagheli kavita

आज से करीब 55-60 वर्ष पहले की बाल स्मृतियों में संचित ग्रामीण परिवेश में कृषि कार्य से संबंधित अपने घर के कुछ दृष्टि बिंबों को समेटने सहेजने का प्रयास रचना में किया गया है (algoza bagheli kavita)वस्तुतः यह  यथा स्थिति का कल्पनाओं और व्यंजनाओं से अलग वस्तुस्थिति का यथार्थ चित्रण है  ।रचना में उल्लेखित भूमि पुत्रों के नाम यथावत "       " " में दर्शाए गए हैं। यह रचना व्याकरण की भाषा में त्रुटियों से भरी है परंतु इसका भाव प्रवाह ही रचना का मूल स्रोत है कृपया मेरा यह लंबा वक्तव्य एवं रचना श्रेष्ठजनों, गुणीजनों, विद्वतजनों के समक्ष क्षमा के साथ सादर प्रस्तुत है

  विशेष -----रचना में "अलगोजा"वाद्य यंत्र का उल्लेख किया गया है यह एक ऐसा वाद्य यंत्र है जो दो बांसुरियों को दोनों हाथों में अलग-अलग पकड़ कर इसे मुंह में एक साथ फंसा कर एक ही फूंक से बिना रुके एक साथ दो सुरों में बजाया जाता है

शायद दुर्लभ और अद्भुत वाद्य यंत्र जो आज भी राजस्थान के जैसलमेर क्षेत्र में लोक संस्कृति के रूप में विद्यमान है अद्भुत कला एवं अद्भुत कलाकार हमारे घर में काम करने वाले धरतीपुत्र स्वर्गीय चिन्ना बाबा को और उनकी लोक संगीत की कला को नमन। प्रस्तुत है रचना-------

 चिन्ना बाबा का अलगोजा

algoza-hindi-kavita


हर किसान के हर हैं कितने,

उसका रुतबा बतलाते

और समाज के बीच में उसको,

ऊंचा ओहदा दिलवाते  ।।

सात हरन आपन घर,

होत रहा किसान

गोइंडहरे के लोग सबै जन,

देत रहे सम्मान  ।।

"सुरजा" "गिल्ला" "रम्मा" "चिन्ना"

अउर "गैबिया " काका

खेत जोतते टप्पा गाते,

बजते ढोल-ढमाका  ।।

"चिन्ना " बब्बा" का अलगोजा,

देवी पूजन में बजता

और कजलियां होरी के दिन,

महफिल में भी सजता ।।

"नाते " "व्यकंट" भोर सुबह उठ,

पहट चराने जाते

गाय-भैंस दुधारुन का,

काट के चारा लाते  ।।

बड़े "जानकी "पंडित जी,

घर कै करैं देमानी

दरना-पिसना साथ द्याखंय,

खेती खरिहानी  ।।

सामां,कोदबा,जोनरी,अरहर,

तिली कै होत सियारी

अरसी, मसुरी,जबा, चना ,

गोहूं कै फसल पकै उन्हारी ।।

उरदा, मूंग,अरहर,अमारी,

जोनरी संग बोई जाती

मिश्रित खेती लाभ का धंधा,

सीख हमें दे जाती  ।।

लोहंदी,जड़हन, बादशाहभोग

धान कै होय रोपाई

करगा,करधना दूधी कै,

मचउआ  से होत बोबाई ।।

हर आषाढ़ जब खेत मा,

सुगना कुतरैं धान

गोफना से गूड़ा चलैं,

लइके भागैं प्रान  ।।

धान रोपते रोपनी गाते,

बारी-बारी काका और काकी

होत कम्पटीशन महिला पुरुष के,

कैसे बरनउं  झांकी  ।।

टप्पा केरी तान सबैका,

मधुर सुहानी लागै

अइसन लागै मन हिरना अस,

भरत कुलाचैं भागै  ।।

कटै सियारी राहा आबै,

कुछ दिन जात सुखाई

सूख जात तब पैरी बनके,

बैलन से होत गहाई  ।।

कोहरी,गादा चउंस्याला,

स्वाद देते रहे भारी

भूंज तिली के लेड़ुआ बनमैं,

कक्की महतारी ।।

कटै सियारी जब ख्यातन कै,

फिर से होत जोताई

चार बाह पांच बाह कर,

उन्हांरी कै होत बोबाई  ।।

परै मघाउट खेतन मां जब,

प्यांढ़ अमल्लक बाढ़ै

दूगुन दाना ख्यात उपजै,

किसान मुसकाबै  ।।

बीसा माहीं गोहूं कटिकै,

जब खरिहन्ने आबै

पइरी बनके होत गहाई ,

भिनसर्रे  दांय चलामैं ।।

गाह -गूह के   ओसाय के,

रास खरिहन्ने लागै

देख-देख के खुसी किसनमा

मन ही मन मुसकाबै  ।।

"दुक्कड़ "काका रास नापैं,

खास बोलाये जाते

उनके हांथ जादू अइसन,

लोग-बाग बतलाते  ।।

उनके छूतै दाना बाढ़य,

डेढ़ गुना या सवाई

राम नाम लै कुरइन से,

करते रहैं नपाई  ।।

बीस कुरई के नाप-जोख ,

कहत रहे हैं खांड़ी

एक-एक खांड़ी नांप-नांप के,

भरते रहे बखारी  ।।

हर अमावस धरतीपुत्रन का,

खास  होय सत्कार

उनकी चाही इच्छा कै,

घर मां बनय जेउनार  ।।

बैठ दुपहरी भोजन करते,

असीष बरसाते

उनके असीष डकार से हम,

धन्य-धन्य हो जाते  ।।

इन धरतीपुत्रन के दम से ,

रुतबा चमकै भारी

उनके खून-पसीना-श्रम का,

सारा घर आभारी  ।।

साठ साल के बाद आज हम,

उनकै महिमा गायन

टूटा-फूटा जइसन बन पड़ा,

बंदन गीत सुनायन  ।।

algoza-hindi-kavita
नरेन्द्र सिंह बघेल

नरेन्द्र सिंह बघेल की अन्य रचना पढ़े :

आपको algoza bagheli kavita-  चिन्ना बाबा का अलगोजा/नरेन्द्र सिंह बघेल  की  रचना  कैसी लगी अपने सुझाव कमेन्ट बॉक्स मे अवश्य बताए अच्छी लगे तो फ़ेसबुक, ट्विटर, आदि सामाजिक मंचो पर शेयर करें इससे हमारी टीम का उत्साह बढ़ता है।

हिंदीरचनाकार (डिसक्लेमर) : लेखक या सम्पादक की लिखित अनुमति के बिना पूर्ण या आंशिक रचनाओं का पुर्नप्रकाशन वर्जित है। लेखक के विचारों के साथ सम्पादक का सहमत या असहमत होना आवश्यक नहीं। सर्वाधिकार सुरक्षित। हिंदी रचनाकार में प्रकाशित रचनाओं में विचार लेखक के अपने हैं और हिंदीरचनाकार टीम का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है।|आपकी रचनात्मकता को हिंदीरचनाकार देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए help@hindirachnakar.in सम्पर्क कर सकते है| whatsapp के माद्यम से रचना भेजने के लिए 91 94540 02444, ९६२१३१३६०९  संपर्क कर कर सकते है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

सभी साथियों से अनुरोध है कि यदि आपकी मातृभाषा हिंदी है,
तो यहाँ अपनी टिप्पणी भी हिंदी (देवनागरी लिपि)
में ही प्रकाशित करने की कृपा कीजिए!
टिप्पणी पोस्ट करने से पहले
ई-मेल के द्वारा सदस्यता ले लिया कीजिए,
ताकि आपकी टिप्पणी प्रकाशित होने के बाद में यहाँ होनेवाली चर्चा का पता भी आपको चलता रहे और आप बराबर चर्चा में शामिल रह सकें!