ठिठुर गया सूरज
ठिठुर गया
शीतलहर से सूरज भी
तल्ख हो गया
मौसम का रुख़ और भी
ठंडी हवाओं के बीच
कोहरे की चादर बिछ गई
दिन भर आसमान की ओर
लोग टकटकी लगाए बैठे हैं
और नगीना टी स्टाल पर
चाय की चुस्कियां भी ले रहे हैं
सत्ता की राजनीति
की गाड़ी को
अपने भड़काऊ भाषण
की कील से
पंचर करने के
मंसूबों पर विपक्षियों को
अब ग्रहण लग गया
उनके पास कोई काम नहीं
अब उनका कोई नाम नहीं
उन्हें कुंवारेपन की दुनिया
से भी निकाल देना चाहिए
दाम्पत्य जीवन के बंधन
में बांध देना चाहिए
कानी हो, लगंड़ी हो लूली हो
जो भी आफर हो
स्वीकार कर लेना चाहिए
यदि छुट्टा घूमते रहेंगे
तो किसी दिन कांजी हाउस
में बांध दिए जायेंगे
वैसे अब सत्तर साल के
इस लुकाछिपी के खेल
को जनता जान चुकी है
मुखौटों में छिपे चेहरे को
पहचान चुकी है
डॉ० सम्पूर्णानंद मिश्र
प्रयागराज फूलपुर
7458994874


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