baghelee mein ashaadhee dohe
प्रसंग वश चल रहे वार्तालाप से उपजे ग्रामीण परिवेश के कुछ बघेली में अषाढ़ी दोहे। प्रथम प्रयास। विनम्रता के साथ गलतियां क्षमा करेंगे।
बघेली में अषाढ़ी दोहे/नरेंद्र सिंह बघेल
(खा
बहुत हुआ सत्कार ।
(४) झमाझम बरसात है,
बरसन लागे मेघ ।
मां के अंचरा मा दुबुक,
लूट रहे हैं नेह ।
(५)लये किसनवां हल चला,
दो बैलन के साथ ।
धरती सीना चीरता,
चुऐ पसीना माथ ।
(५) भर अषाढ़ जब खेत मा,
सुगना कतरैं धान ।
गोफना से गूड़ा चलै,
लईके भागैं प्रान ।
(६) सूरन कै ढ़ेई निकसि,
धरती सीना चीर ।
कढ़ी बनी जेउनार मा,
भउजी का भै पीर ।
(७) घर के बारी मा चढ़ी,
खोटलइया कै बेल ।
बनी फिरंगी चउवारे मा,
लड़िकन का भा खेल ।
(८) लये गुड़ंता चल पड़ी,
लड़िकन केरी फौज ।
जीत गुड़ंता अपना,
होय मैदाने मौज ।
(९)दारभरी पूरी बनी,
अउर आम रसधार ।
फूफा जब अइहैं घरै,
तबहिन उघरी पाल ।
![]() |
| नरेंद्र सिंह बघेल |
अन्य कविता पढ़े :
आपको baghelee mein ashaadhee dohe-बघेली में अषाढ़ी दोहे/नरेंद्र सिंह बघेल की रचना कैसी लगी अपने सुझाव कमेन्ट बॉक्स मे अवश्य बताए अच्छी लगे तो फ़ेसबुक, ट्विटर, आदि सामाजिक मंचो पर शेयर करें इससे हमारी टीम का उत्साह बढ़ता है।
हिंदीरचनाकार (डिसक्लेमर) : लेखक या सम्पादक की लिखित अनुमति के बिना पूर्ण या आंशिक रचनाओं का पुर्नप्रकाशन वर्जित है। लेखक के विचारों के साथ सम्पादक का सहमत या असहमत होना आवश्यक नहीं। सर्वाधिकार सुरक्षित। हिंदी रचनाकार में प्रकाशित रचनाओं में विचार लेखक के अपने हैं और हिंदीरचनाकार टीम का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है।|आपकी रचनात्मकता को हिंदीरचनाकार देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए help@hindirachnakar.in सम्पर्क कर सकते है| whatsapp के माद्यम से रचना भेजने के लिए 91 94540 02444, ९६२१३१३६०९ संपर्क कर कर सकते है।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
सभी साथियों से अनुरोध है कि यदि आपकी मातृभाषा हिंदी है,
तो यहाँ अपनी टिप्पणी भी हिंदी (देवनागरी लिपि)
में ही प्रकाशित करने की कृपा कीजिए!
टिप्पणी पोस्ट करने से पहले
ई-मेल के द्वारा सदस्यता ले लिया कीजिए,
ताकि आपकी टिप्पणी प्रकाशित होने के बाद में यहाँ होनेवाली चर्चा का पता भी आपको चलता रहे और आप बराबर चर्चा में शामिल रह सकें!