aisa to maaloom na tha
राजहंस परिवार की सूत्रधार परम आदरणीया श्रीमती किरण सिंह जी के आदेशानुसार अपनों से अपनों का परिचय कराती एक छोटी सी रचना बड़ी विनम्रता के साथ सादर प्रस्तुत है।
** ऐसा तो मालूम न था **
पास भी रहकर दूर रहेंगे,
ऐसा तो मालूम न था ।
उन पर पैबंदों का पहरा,
ऐसा तो मालूम न था ।।
लम्हा-लम्हा, क़तरा-क़तरा,
आंखों से आंसू छलके ।
आंखों को भी दर्द हुआ था,
ऐसा तो मालूम न था ।।
पास भी रहकर दूर रहेंगे,
गुलशन-गुलशन, मंजर-मंजर,
एक खुश्बू पैबस्ता सी ।
उसमें तेरी रूह बसी थी,
ऐसा तो मालूम ना था ।।
पास भी रहकर दूर रहेंगे,
रुनझुन-रुनझुन पायल की धुन
आज बहुत दिन बाद सुनी ।
वह थी बेगाने की सरगम,
ऐसा तो मालूम न था ।।
पास भी रहकर दूर रहेंगे,
घर के दरवाजे पर दस्तक,
देती एक एहसास मुझे ।
शायद कोई बेगाना था,
ऐसा तो मालूम न था ।।
पास भी रहकर दूर रहेंगे,
आओ दिल में झांक के देखें,
अपनी क्या? तस्वीर बसी ।
जर्रा-जर्रा नाम लिखा था,
ऐसा तो मालूम न था ।।
पास में रहकर दूर रहेंगे,
ऐसा तो मालूम न था ।।
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| नरेंद्र सिंह बघेल |
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