रविवार, 29 नवंबर 2020

kavita- seeta ki vyatha| सीता की व्यथा / सीताराम चौहान पथिक

 kavita- seeta ki vyatha

सीता  की व्यथा 

 

kavita- seeta- ki- vyatha

भूमि - सुता ---सीता जननि ,

त्याग - पुंज  अभिराम  ।।

नारि - जगत  की   प्रेरणा  ,

त्वम    श्री चरण   प्रणाम ।।

 

दोनों  ही    अनुपूरणक    ,

सिया   और   श्री राम 

भारत - भू  कॄत - कॄत हुई ,

जपहि    निरन्तर    नाम  ।।

 

पितॄ - पक्ष  ससुराल - पक्ष ,

दोनों  कुल   की   कानि 

सिया - चरित  आदर्श  है  ,

नारी ---  तू   पहचान  ।।

 

वनवासी   श्री राम   की  ,

सेवा   का  सद - धर्म  

छाया  बन कर  सिया ने  ,

सदा   निभाया   धर्म   ।।

 

धन्य - धन्य   मां  जानकी  ,

राम - आज्ञा   को  मान 

अग्नि -  परीक्षा दी  तदपि ,

खोली   नहीं   जुबान   ।।

 

लोकापवाद  से  हिल गई ,

राम - राज्य   प्राचीर  

सीता   जैसी  पति - व्रता ,

आरोपों    के    तीर   ।।

 

जन - संशय  नहीं थम सका ,

हुआ   पुनः   वन - वास 

राम  -  हॄदय  की  वेदना  ,

भूल   गया   इतिहास   ।।

 

सीता   युग  की  चेतना  ,

मर्यादा   का    नाम  

नारी   का  आदर्श   सिय ,

सिया  बिनु   ना  ही  राम ।।

 

जनक - नंदिनी  की  व्यथा ,

नारी   का   कटु  सत्य 

शिला  अहिल्या  युगों  तक ,

सहती   रही   असत्य   ।।

 

रघुकुल  की सौभाग्य लक्ष्मी ,

क्रूर   भाग्य   का  लेख 

सुखमय   जीवन  जी  सकें ,

सिया   के  भाग्य  ना रेख ।।

kavita- seeta- ki- vyatha
सीताराम चौहान पथिक

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