kavita-jhoothe hain sahaare
झूठे
हैं
सहारे
दर्दे दिल किसको सुनायें भगवन,
इस जगह जलती कई एक चितायें भगवन,
हर कोई आया यहाँ मीठी कटारी जैसे,
कर गया वार देख मौका शिकारी जैसे,
हम तो तडफे भी नहीं कैसे बतायें भगवन।
दर्दे दिल किसको सुनायें भगवन। (१)
एक तुमहीं तो हो जो पास चला आता हूँ,
बैठकर पास तेरे हाल सब सुनाता हूँ,
और सब झूँठ है झूँठे हैं सहारे भगवन।
दर्दे दिल किसको सुनायें भगवन। (२)
सारी दुनियाँ रिश्ते नातों को छोड़ आया है,
अब तो अरविंद तुम्हारी शरण में आया है,
चाहो तो पार करो दास की नैइया भगवन।
दर्दे दिल किसको सुनायें भगवन (३)
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| अरविन्द जायसवाल |
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अत्यंत ही प्रिय,ह्रदयस्पर्शी कविता लिखते है कविवर,ईश्वर करे कि आप ऐसे जी ज्यादा से ज्यादा कविता लिखते रहिये।
जवाब देंहटाएंआप सभी को कविता पसंद आई इसके लिए हृदय से आभार मैं मेरी कलम दोनों सार्थक हुए। धन्यवाद सहित।
जवाब देंहटाएंआपका