नवरात्री विशेष २०२० में अरविन्द जायसवाल की कलम से माँ गौरी को समर्पित माँ गौरी कविता और अपनी दूसरी रचना चाहत जो प्रियतम की याद मे गीत गुनगुनाये
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| maa durga par kavita |
गौरी माता शिवशंकर की प्यारी कहलाती हैं,
हर दीन दुखी को माता अपने गले लगाती हैं।
जो माँ का पूँजन करे सदा श्रद्धा से भर जाये,
ना रहे कष्ट कोई उसको मनवांक्षित फल पाये।
करती सबके दुःख दूर सभी के कष्ट मिटती हैं,
गौरी माता शिवशंकर की प्यारी कहलाती हैं।
गणपति की हैं वो माता रिद्धी सिद्धी की दाता,
सब कोई पूँजता उनको जो ना पूँजे पछिताता।
हर वर्ष सुनो नवरात्रि काल में घर घर आती हैं,
गौरी माता शिव शंकर की प्यारी कहलाती हैं।
अरविंद तू भज ले उनको तेरे बिगड़े काम बनेंगे,
वो दया दृष्टि कर देंगी तेरे सब दुःख टलेंगे।
माता अपने बालक की हर जिद सह जाती हैं,
गौरी माता शिव शंकर की प्यारी कहलाती हैं।
2. चाहत
आज प्रियतम तुम्हे पाकर,
गीत हमने गुनगुनाये।
जिंदगी अनमोल है ऐसा लगा,
प्रेम ही परिपूर्ण है सचमुच लगा,
दो दिये चाहत के हमने हैं जलाये।
आज प्रियतम तुम्हे पाकर,
गीत हमने गुनगुनाये।
चाहता हूँ फिर ना तुमसे बिछड़ना,
सारा जीवन तुमको चाहूँ सौंपना,
क्या बताऊँ नीर आँखों ने कहाँ कब कब बहाये,
आज प्रियतम तुम्हें पाकर,
गीत हमने गुनगुनाये।
मैं जिऊँगा बिन तुम्हारे अब नहीं,
ओट होना ना नजर से फिर कहीं,
आज तुमको देखकर होंठ मेरे मुस्कराये।
आज प्रियतम तुम्हें पाकर,
गीत हमने गुनगुनाये।
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| अरविन्द जायसवाल |


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