मंगलवार, 20 अक्टूबर 2020

bhagwan shri ram par kavita- सीता राम चौहान पथिक

 bhagwan shri ram par kavita

सीता राम चौहान पथिक की कलम से भगवान श्री राम पर कविता कहां मिलेंगे राम भारत सहित कई देशों में श्री राम अत्यंत पूजनीय एवं आदर्श पुरुष है 
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कहां मिलेंगे राम

 

 

बोल अवध की माटी - तू ही, कहां मिलेंगे राम

तेरी ही माटी में खेले थे - त्रेता में राम

 

प्रजा आज दे रही दुहाई ,

कष्ट हरो  आकर रघुराई ,

मानवता होती खंड - खंड,

पशुता का शासन बे- लगाम।

 

बोल अवध की माटी, तू ही कहां मिलेंगे राम

आतंकी रावण का साया ,

अखिल विश्व पर उसकी छाया

भस्मासुरी शक्तियां करती   ,

ध्वस्त  सुदृढ़   निर्माण   ।।

 

बोल अवध की माटी तू ही, कहां मिलेंगे  राम 

राम - राज्य गांधी का सपना,

वह सपना जन-जन का अपना ,

भ्रष्ट आचरण की  वेदी  पर  ,

मॄत - गांधी  का  कोहराम

 

बोल अवध की माटी तू ही- कहां मिलेंगे राम

वंशज दुःशासन के तमाम ,

चीर- हरण  है  बे - लगाम ,

हत्याएं  और  डकैती जैसे ,

जन - प्रतिनिधि करते काम

 

बोल अवध की माटी तू ही - कहां मिलेंगे राम

प्रजा - तन्त्र के यह संरक्षक ,

अपने  ही कानून के भक्षक ,

सेवक बन चुनाव को जीते  ,

मतदाता  अब जैसे गुलाम

बोल अवध की माटी तू ही - कहां मिलेंगे राम

जासु राज प्रिय प्रजा दुःखारी,

सो नॄप अवस नरक अधिकारी

तुलसी का यह कथन असंगत

प्रजा नरक - नॄप स्वर्ग समान

 

बोल अवध की माटी तू ही - कहां मिलेंगे राम

ध्वस्त हो रहीं मर्यादाएं  ,

पुत्रों से दुखिया माताएं ,

नारी ने त्यागा सौम्य रूप ,

पश्चिम का पीकर एक जाम

 

बोल अवध की माटी तू ही - कहां मिलेंगे राम

अरबों - खरबों के घोटाले  ,

नीयत खोटी धंधे काले ,

विश्वासघात पग - पग मिलता

कैसे कह दें  - भारत महान 

 

बोल अवध की माटी तू ही - कहां मिलेंगे राम

हे पंच तत्व - पुनः योग करो ,

ब्रह्मात्मा  का कर  ध्यान   ,

दिव्य - ज्योति नभ से उतरे ,

शिशु बन कर राम समान 

 

बोल अवध की माटी तू हीकहां मिलेंगे राम

तेरी ही माटी में - खेले थे त्रेता में राम ।।

 

सीता राम चौहान पथिक

 

 


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