रविवार, 8 नवंबर 2020

पड़ोसी खतरनाक है-padosee khataranaak hai

padosee khataranaak hai 

padosee -khataranaak- hai
padosee khataranaak hai 


       पड़ोसी खतरनाक है । 


सावधान प्रिय देश- पड़ोसी खतरनाक है , 

सीमा पर खूनी खेल-हुई अब आम बात है , 

अब तलक पियेगा ज़हर,उगलने की बारी है, 

अब नेत्र तीसरा खोल, पड़ोसी खतरनाक है । 


छल-कपट कूटनीति से, उसका गहरा रिश्ता , 

उसकी हर चाल में फऺस जाता तू समझ फरिश्ता , 

फिर भी यदि समझ ना आए, विरोधी कहें मूर्खता , 

है पंच शील  के भूत , पड़ोसी खतरनाक है । 


कुछ हिम्मत इन्दिरा - शास्त्री जी की रंग लाई , 

बना बंगला - देश , दूर लाहौर ध्वजा भारत फहराई , 

ताशकंद में दुरभि - सन्थि , भारत पछताया , 

गये  लाल परलोक , पड़ोसी खतरनाक है। 


द्वितीय पड़ोसी चीन - ना जिसका दीन- गिरगिटी रंग बदलता , 

हिंदी - चीनी भाई , कंटीला शूल दिलों में बहुत खटकता, 

किया पीठ पर वार , चाऊ-नेहरू के रिश्ते , 

कर लेना फिर याद , पड़ोसी खतरनाक है । 


सावधान  प्रिय  देश , पड़ोसी को पहचानो , 

चाणक्य - नीति  कर याद , शत्रु को  कम मत जानो , 

घायल हैं विष - नाग , कुचल डालो  फन- उसका , 

पथिक , ना कर दे बर्बाद -- पड़ोसी  खतरनाक है ।। 

padosee- khataranaak -hai
सीताराम चौहान पथिक

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