सोमवार, 2 नवंबर 2020

प्रगतिशील नारी-pragatisheel naaree-सीताराम चौहान पथिक

 pragatisheel naaree

pragatisheel -naaree


प्रगतिशील नारी से 2020 । 


                             

नारी का अध- नग्न प्रदर्शन , 
क्या नारी इतनी निर्बल  है ॽ
नारी तो शिव - शक्ति स्वरूपा , 
वेदों में यज्ञ - पूर्ति सम्बल  है । 

कहां गया नारी का आत्म- बल ॽ
पश्चिम का  आदर्श बन  पाती  ।
जर्जर  संस्कृति  पश्चिम  की  , 
 उसे अध्यात्म - मार्ग दिखलाती ।


नारी तो शक्ति - लज्जा का संगम , 
श्रद्धा - विश्वास जड़ित नग  नारी । 
जागो शक्ति  स्वयं  को समझो   , 
पूर्णता  की  पहचान  हो  नारी  । 

शिक्षित  नारी आधुनिका  बन , 
भूल रही  भारतीय  - मर्यादा  । 
नारी  बिन  सब  देव  अधूरे  , 
शिव  का  वाम अंग है  आधा । 

पश्चिम की  चकाचौंध में  नारी , 
यौवन  को नीलाम करो  मत । 
आदर्शों  की  बलि देकर  यूं  , 
नारी - पद का अपमान करो मत । 

मद्य - पान  क्लबों  में  जाना  , 
प्रगति नहीं , यह अप- संस्कृति है।
विज्ञापन में  देह - प्रदर्शन    ,  
 नैतिकता  की  अति विकॄति है । 

पाश्चात्य - नारी भी सुख  तज  , 
शान्ति - खोज में भारत आती । 
माथे  चन्दन  तिलक लगाती  , 
 हरे राम कृष्णा पद  गाती  । 

मन्दिर जाती    आश्रम  जाती , 
योग - साधना  को  अपनाती । 
धर्म - प्रचारक   बन स्वदेश में , 
शान्ति - प्राप्ति के गुर सिखलाती। 

नारी उन्नति करे -  विश्व पग धरे ,
किन्तु  भारत  की होकर रहे  । 
यही  है  भारत  की  नारी   , 
विश्व  विस्मित  हो कर यह कहें । 

जागो  जागो  भारत ललनाओ  , 
भारत  निर्बल  देश नहीं  है  । 
 रामायण  -   गीता घर - घर में , 
  वैदिक - परम्परा  वेष वहीं  है । 

कर सुषुप्त अन्त स्थल  जागॄत , 
छलनाओ में  बह  मत  नारी  ।
धन - पद - नाम - ख्याति के पीछे,
राष्ट्र  महान है । भूल मत  नारी  । 

तुम से  बस  इतना कहना  है  , 
 पश्चिम  को  भारतीय रंग दे दो । 
बहा स्नेह  की  अमॄत  - गंगा  ,  
 अंतर्मन   उसका तर  कर  दो  ।। 


सीताराम चौहान पथिक

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