pragatisheel naaree
प्रगतिशील नारी से 2020 ।
नारी का अध- नग्न प्रदर्शन ,
क्या नारी इतनी निर्बल है ॽ
नारी तो शिव - शक्ति स्वरूपा ,
वेदों में यज्ञ - पूर्ति सम्बल है ।
कहां गया नारी का आत्म- बल ॽ
पश्चिम का आदर्श बन पाती ।
जर्जर संस्कृति पश्चिम की ,
उसे अध्यात्म - मार्ग दिखलाती ।
नारी तो शक्ति - लज्जा का संगम ,
श्रद्धा - विश्वास जड़ित नग नारी ।
जागो शक्ति स्वयं को समझो ,
पूर्णता की पहचान हो नारी ।
शिक्षित नारी आधुनिका बन ,
भूल रही भारतीय - मर्यादा ।
नारी बिन सब देव अधूरे ,
शिव का वाम अंग है आधा ।
पश्चिम की चकाचौंध में नारी ,
यौवन को नीलाम करो मत ।
आदर्शों की बलि देकर यूं ,
नारी - पद का अपमान करो मत ।
मद्य - पान क्लबों में जाना ,
प्रगति नहीं , यह अप- संस्कृति है।
विज्ञापन में देह - प्रदर्शन ,
नैतिकता की अति विकॄति है ।
पाश्चात्य - नारी भी सुख तज ,
शान्ति - खोज में भारत आती ।
माथे चन्दन तिलक लगाती ,
हरे राम कृष्णा पद गाती ।
मन्दिर जाती आश्रम जाती ,
योग - साधना को अपनाती ।
धर्म - प्रचारक बन स्वदेश में ,
शान्ति - प्राप्ति के गुर सिखलाती।
नारी उन्नति करे - विश्व पग धरे ,
किन्तु भारत की होकर रहे ।
यही है भारत की नारी ,
विश्व विस्मित हो कर यह कहें ।
जागो जागो भारत ललनाओ ,
भारत निर्बल देश नहीं है ।
रामायण - गीता घर - घर में ,
वैदिक - परम्परा वेष वहीं है ।
कर सुषुप्त अन्त स्थल जागॄत ,
छलनाओ में बह मत नारी ।
धन - पद - नाम - ख्याति के पीछे,
राष्ट्र महान है । भूल मत नारी ।
तुम से बस इतना कहना है ,
पश्चिम को भारतीय रंग दे दो ।
बहा स्नेह की अमॄत - गंगा ,
अंतर्मन उसका तर कर दो ।।
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| सीताराम चौहान पथिक |
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