Hume jana hai poetry
हमें जाना है
हमे जाना है देखो,रोकने की बात मत करना।
भले हो सांझ लेकिन,भूल से भी रात मत करना
दीवट के दिये को साँझबाती का पता देना,
सुनहरी भोर को भी द्वार और आंगन बता देना।
बता देना चिरैया को
उसे भी रोज आना है।
सुनाती है प्रभाती गुनगुना
कर रोज गाना है।
महकते फूल उनको तोड़नेकी बात मत करना।
हमें जाना है देखो भूलकर भी रात मत करना
मेरे माथे पर कुमकुम का
बड़ा सा लाल टीका हो।
देना ध्यान कि सिंदूर का भी
रंग ना फीका हो।
मेरे सज्जा के खातिर
पुष्प की कालिया नही लाना।
आँखों में भी आँसू की भरी
लड़ियाँ नही लाना।
छिपे जो राज उनको खोलनेकी बात मत करना।
भले हो सांझ लेकिन भूलकर भी रात मत करना।
तुम्हारे साथ चलना अब
नही सम्भव हमें लगता।
जरा तुम तेज चलते हो,
मेरा सामर्थ्य नही उतना।
हमें है ज्ञात तुममें धैर्य की
तादात ज्यादा है।
अडिग हो शैल से पर
मोम सी कुछ बात ज्यादा है।
विदा देना मगर मुखमोड़ने की बात मत करना।
हमे जाना है देखो भूलकर भी रात मत करना।
![]() |
| पुष्पा श्रीवास्तव शैली |
हमें विश्वास है कि हमारे लेखक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित लेखिका का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।लेखक की बिना आज्ञा के रचना को पुनः प्रकाशित’ करना क़ानूनी अपराध है |आपकी रचनात्मकता को हिंदीरचनाकार देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए help@hindirachnakar.in सम्पर्क कर सकते है|whatsapp के माद्यम से रचना भेजने के लिए
91 94540 02444, संपर्क कर कर सकते है।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
सभी साथियों से अनुरोध है कि यदि आपकी मातृभाषा हिंदी है,
तो यहाँ अपनी टिप्पणी भी हिंदी (देवनागरी लिपि)
में ही प्रकाशित करने की कृपा कीजिए!
टिप्पणी पोस्ट करने से पहले
ई-मेल के द्वारा सदस्यता ले लिया कीजिए,
ताकि आपकी टिप्पणी प्रकाशित होने के बाद में यहाँ होनेवाली चर्चा का पता भी आपको चलता रहे और आप बराबर चर्चा में शामिल रह सकें!