chaahe raat jitanee badee ho
दोनो मिलकर साथ चलें तो
सारी दूरी घट जायेगी।
चाहे जितनी रात बड़ी हो
हंसते हंसते कट जायेगी।
ऐसे वैसे लोग नही हम
बस परिचय की देरी है।
एक उजाला तुझमे भी है !
एक उजाला मुझमे भी है!
भेदभाव की बातें झूठी
हांड मांस के सब पुतले हैं।
कोई खुद को जान न पाया
सुधियों के दरपन धुंधले हैं।
हम दोनो का लहू एक है
और लहू का रंग एक है।
ऊपरवाला तुझमे भी है।
ऊपरवाला मुझमे भी है।।
बस थोडी सी कोशिश करनी
अमृत की रसधार बहेगी।
टूट गयीं यदि मन की कडियां
नफरत की दीवार ढहेगी।
थोडी हिम्मत और जुटाओ
अन्तस्थल मे गहरे जाओ।
इक मधुशाला तुझमे भी है
इक मधुशाला मुझमे भी है।
तू भी अपना द्वार न खोले
मेरे भी हैं बंद दरीचे।
भीतर भीतर बड़ी घुटन है
बाहर बाहर खिले बगीचे।
चाहे जो भी नाम उसे दो
धर्म जाति वैचारिक बंधन।
कोई ताला तुझमे भी है
कोई ताला मुझमे भी है।
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