सोमवार, 2 नवंबर 2020

tab aana mere gaanv mein

 tab aana mere gaanv mein

tab -aana- mere- gaanv- mein



 तब   आना  मेरे  गांव  में  




मन जब ऊबे शहर से भाई ,  
 तब  आना  मेरे  गांव  में  
ठंडी ठंडी  हवा का झोंका,  
 मिले  नीम  की  छांव  में 

सुबह-सुबह पुरवाई आकर 
 राम-राम   जब  करती है  
सपनों की चादर में लिपटी
 अलसाई आंख  उघरती है 

बैठा है   मुंडेर  पर   कागा  
कुछ कहता कर्कश कांव में 
मन जब ऊबे शहर से भाई  
तब  आना   मेरे   गांव  में  

 खग कुल का कलरव कानों 
  में   मीठी  तान  सुनाता है 
 दायां  हाथ धरा   को छूकर  
 माथे  तिलक   लगाता   है 

घर से   दूर  बाग   में जाना  
बैठना  ओट की  ठांव में 
मन जब ऊबे शहर से भाई  
तब आना   मेरे  गांव में  

अन्नपूर्णा   का   आशीष  ले  
कदम   द्वार   पर  आते   हैं  
हाथ जोड़ अभिवादन करके 
 पूरब   में   शीश   झुकाते हैं 

नदी पार यदि  जाना  है  तो 
बैठो   भगत   की  नाव   में 
मन जब ऊबे शहर से भाई 
तब   आना   मेरे    गांव में 

खूंटे बंधी  गाय भी  उठकर  
अम्मा की   टेर   लगाती है 
चारा पानी   अभी  मिलेगा 
 इसे   जान  इतराती    है  

लेकर  दोहनी  आती   अम्मा  
लगे  न  ठोकर   पांव    में 
मन जब   ऊबे  शहर से भाई 
 तब  आना  मेरे   गांव   में 

गौ सेवा के बाद स्वयं की  
 दिनचर्या पूरी कर लेना 
 तब तक प्राची में सूर्योदय 
 दिनकर को शीश झुका देना 

 धार धवल धारोष्ण दूध की 
होता प्रमुदित मन का कोना 
 पूजन  वंदन में भी प्रतिदिन 
 ठाकुर  जी का पग  धो लेना 

 तुलसी दल अर्पित करके ही
 भोग  प्रभू   का   भाव   में 
मन जब ऊबे शहर से भाई 
तब  आना   मेरे   गांव   में 

शाम ढले  ढिबरी  जल जाती
मन्दिर   में   घन्टी     बजती 
बच्चे  बूढ़े  सभी    साथ  में  
पूजा     की  थाली   सजती 

सांझ  बियारी  एक साथ ही
होती   घर   घर  गांव    में  
मन  जब ऊबे शहर  से भाई
तब   आना   मेरे   गांव  में 
tab- aana- mere- gaanv -mein
डा .भगवान प्रसाद उपाध्याय


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