desh bhakti kavita yuvaon ko aahvaan
युवाओं को
आह्वान ।
है कहां आज वह राष्ट्र प्रेमॽ
जिस धुन पर नाचे सेनानी।
जागो जागो - है युवा - वर्ग ,
यह राष्ट्र मांगता कुर्बानी ।।
तुम स्मरण करो उस सैनिक को ,
तैनात हैं जो हिम - शिखरों पर ।
केंद्रित है उसकी दूर - दृष्टि ,
फैले आतंकित शिविरों पर।
यह युद्ध अघोषित नगरों में ,
आतंकी छिप कर आते हैं ।
निर्दोष असंख्यो नर - नारी ,
हिंसा की बलि चढ़ जाते हैं ।
है राष्ट्र शक्तिशाली- यद्यपि ,
सरकार शान्ति हल खोज रही
केवल मौखिक धमकीं देकर ,
आतंकी को है रोक रही ।।
है आज मतों की राजनीति ,
आतंकी हैं निर्भीक यहां ।
निर्दोष प्रजा बलि का बकरा ,
दोषारोपण की रीति यहां ।
इस राजनीति की चौपड़ में ,
स्वार्थी - जाम टकराते हैं ।
आरक्षण - अस्त्र थमा हमको ,
हम में संघर्ष कराते हैं ।
आरक्षण का आधार आर्थिक,
केवल निर्धन तम का अधिकार ।
जातिभेद को हम सब भूलें ,
करें हॄदय से यह स्वीकार ।
इस भ्रष्ट तंत्र का उन्मूलन ,
नव - युवा तुम्हें करना होगा ।
लोगों को शिक्षित कर उनमें ,
कर्तव्य - बोध भरना होगा ।
जागो - जागो हे युवा - वर्ग ,
इतिहास तुम्हें लिखना होगा।
कथनी - करनी का भेद मिटा
विश्वास - पात्र बनना होगा ।
दृढ राष्ट्- भावना के अंकुर
नागरिकों में भरने होंगे ।
और देश - द्रोहियों के सपने
समूल नष्ट करने होंगे ।।
छल और प्रपऺची दुःशासन
धृतराष्ट्र - दमन करना होगा।
भूलें - बिसरे जन - नायक में
नव स्वाभिमान भरना होगा
भारत की जर्जर राजनीति ,
केवल सत्ता पर आधारित ।
भारत के भावी प्रतिनिधियो
गणतंत्र तुम्हीं पर है आश्रित
उज्ज्वल चरित्र के प्रतिनिधि ही ,
संसद- गरिमा लौटायेगे ।
कौटिल्य- नीति अपनाने से ,
सिर - मौर विश्व कहलायेंगे
तुम नव
प्रभात नव आशा
हो
भारत के भाग्य - विधाता हो हे क्रान्ति दूत,
आदर्श बनो , तुम ही राष्ट्र - निर्माता हो ।
आह्वान पथिक का है तुमको
हनुमंत - शक्ति को पहचानो
तुम कॄपा पात्र श्री राम के हो नव- युवा स्वयं को पहचानो
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