sampoornaand mishr kee kavita chakravyooh
चक्रव्यूह
छलावे में
नहीं आना चाहिए
बनाना होगा दास इसको
तभी मिल सकती है
इंद्रियों पर विजय
बहुत कठिन होता है
नियंत्रण इस पर
भटका देता है यह मनुष्य को
विषय- वासनाओं के जाल में
बहुत गहरी होती है
काम, क्रोध लोभ की सरिता
बहा ले जाती है बहुत दूर तक
जहां शिनाख़्त
मिटा देता है आदमी अपना
वास्तविक चेहरा नहीं देख
पाता है आत्मा के दर्पण में
नहीं निकल पाता है
मोह के चक्रव्यूह से
साधना की ज़रूरत होती है
मन को बांधने के लिए अनवरत
मन को भी समझना होगा
विषय की सत्यता को
नहीं तो यह डुबो देगा
अंधकार के इस भवसागर में
सत्य माने बैठे हैं जिसको हम
वह तो केवल छलावा है
आंखों का लोभ लुभावन भ्रम है
नियंत्रण चाहते हैं
यदि इंद्रिय रूपी घोड़े पर
तो मन के सारथी को
समझना होगा बहुत शिद्दत से
जगत की नश्वरता को
![]() |
| लेखक के बारे मे जाने |
संपूर्णानंद मिश्र
प्रयागराज फूलपुर
7458994874
आपको sampoornaand mishr kee kavita chakravyooh - सम्पूर्णान्द मिश्र की कविता चक्रव्यूह कैसी लगी अपने सुझाव कमेन्ट बॉक्स मे अवश्य बताए अच्छी लगे तो फ़ेसबुक, ट्विटर, आदि सामाजिक मंचो पर शेयर करें इससे हमारी टीम का उत्साह बढ़ता है।
हिंदीरचनाकार (डिसक्लेमर) : लेखक या सम्पादक की लिखित अनुमति के बिना पूर्ण या आंशिक रचनाओं का पुर्नप्रकाशन वर्जित है। लेखक के विचारों के साथ सम्पादक का सहमत या असहमत होना आवश्यक नहीं। सर्वाधिकार सुरक्षित। हिंदी रचनाकार में प्रकाशित रचनाओं में विचार लेखक के अपने हैं और हिंदीरचनाकार टीम का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है।|आपकी रचनात्मकता को हिंदीरचनाकार देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए help@hindirachnakar.in सम्पर्क कर सकते है| whatsapp के माद्यम से रचना भेजने के लिए 91 94540 02444, ९६२१३१३६०९ संपर्क कर कर सकते है।


आप एक महान कवि हैं आपकी तारीफ़ शब्दों में बयां नहीं कि है सकती। सादर चरण स्पर्श है आपको🙏
जवाब देंहटाएं