शुक्रवार, 27 नवंबर 2020

Poem on coronavirus-कोरोना का कहर-प्रेमलता शर्मा

 Poem on coronavirus

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कोरोना का कहर



ये कैसी बयार चली की दुनिया बदल गई

अपने से मिलने की तस्वीर बदल गई

 हर तरफ मायूसी की एक चादर सी फैली है 

दुनिया की रोनक को ना जाने किसकी नजर लग गई।


 एक ऐसा दर्द मिला गया है जमाने भर को

 कि जिसकी दवा ही नहीं मिल रही है दवाखाने में 

पता नहीं कब जिंदगी मुस्कुराएँगी  सड़कों पर

 कब बच्चों की  खिलखिलाहट सुनाई पड़ेगी उद्यानों में ।


कब पटरी पर दौड़ेगी रेलगाड़ियाँ समय सारणी से 

ना जाने कब यारों के हाथ में यारों के हाथ होंगे ।


इंतजार जो बस उस क्षण का है कि कब

 काले बादलों से उजाले की एक किरण फूटेगी

 हिम्मत ना हारना है ना हौसला टूटने देना है।

 बस सब्र और दूरी बनाकर इस विभिषका पर विजय पाना है


 उम्मीद पे दुनिया टिकी है उम्मीद न टूटने पाए 

फिर वे दिन लौटेंगे दिल में ये आस बाकी है 

देखते देखते यह मुश्किल की घड़ी भी ताल जाएँगी 

फिर एक बार ये दुनिया मुस्कुराएँगी।

 ये जंग हम जीतेंगे हम जीतेंगे जरूर जीतेंगे.....

 बस मेरी  आपसे छोटी सी एक गुजारिश है

पढ़े : कशमकश

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प्रेमलता शर्मा

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