aalokik milan- sitaram chauhan pathik
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| aalokik milan |
अलौकिक मिलन
झनझनाए तार दिल के, गुनगुनाए गीत ।
कौन मधुवन में बजाता कर्णप्रिय मधु गीत ।।
हॄदय सरवर में तरंगें , मचलती है किस लिए ।
मिलन होगा, सोच कर बहती वसंती इस लिए ।।
अब युगों के बाद सूखी पत्तियां हरियायी है ।
श्याम वर्णी कोंपलों में लालिमा भर लाई हैं।।
कौन हरकारा हॄदय के द्वार दस्तक दे रहा ।
यह वियोगी मन मेरा , आभार किसका ले रहा ।।
एक कुम्हलाया कमल नव ऊर्जा से खिल उठा ।
किस अपरिचित लहर से अन्तः सरोवर हिल उठा ।।
सहसा सुगन्थित पवन से , मौन मन विचलित हुआ ।
किसका मिलन संकेत है , यह हॄदय आनंदित हुआ ।।
कोई है अज्ञात कारण यह तरंगें उठ रही ।
कोई मन मोहन बजाता बांसुरी यह सुन रहीं ।।
किस वियोगिन की तपस्या साधना रंग लाई है ॽ
अपने प्रियतम से मिलन की, शुभ घड़ी सुखदाई है ।।
अब युगों की साधना विरहा व्यथा का अन्त है ।
सती से शिव के मिलन पर , खिल रहा वासन्त है ।।
नॄत्य करता मन मयूरा , प्रियतम की चाह से ।
आओ पथिक स्वागत करें , उनका नये उत्साह से ।।
सीता राम चौहान पथिक दिल्ली
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