शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

aalokik milan- sitaram chauhan pathik

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aalokik milan

अलौकिक मिलन
 

 

झनझनाए तार दिल के, गुनगुनाए गीत

कौन मधुवन में बजाता  कर्णप्रिय मधु गीत ।।

 

 

हॄदय सरवर में तरंगें , मचलती है किस लिए

मिलन होगा, सोच कर बहती वसंती इस लिए ।।

 

अब युगों के बाद सूखी पत्तियां हरियायी है

श्याम वर्णी कोंपलों में लालिमा भर लाई हैं।।

 

कौन हरकारा हॄदय के द्वार दस्तक दे रहा

यह वियोगी मन मेरा , आभार किसका ले रहा ।।

 

एक कुम्हलाया कमल नव ऊर्जा से खिल उठा

किस अपरिचित लहर से अन्तः सरोवर हिल उठा ।।

 

सहसा सुगन्थित पवन से , मौन मन विचलित हुआ

किसका मिलन संकेत है , यह हॄदय आनंदित हुआ ।।

 

कोई है अज्ञात कारण     यह तरंगें उठ रही

कोई मन मोहन बजाता बांसुरी यह सुन रहीं ।।

 

किस वियोगिन की तपस्या   साधना रंग लाई है

अपने प्रियतम से मिलन की, शुभ घड़ी सुखदाई है ।।

 

अब युगों की साधना  विरहा व्यथा  का अन्त है

सती से शिव के मिलन पर , खिल रहा वासन्त है ।।

 

नॄत्य करता मन मयूरा , प्रियतम की चाह से

आओ पथिक स्वागत करें , उनका  नये उत्साह से ।।

 

सीता राम चौहान पथिक  दिल्ली

 

 

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