pradhan mantri par kavita
हमारा प्रधान मन्त्री
जिसे भँवरे सुनाते हों,
मधुर संगीत गा गाकर,
जिसे वर्षा बहा ले जाय,
अपने छन्द रस पढ़कर,
कि जिसने भूमि भारत से,
तीन सौ सत्तर हटाई हो,
न जाने कितने आतंकी,
गिरे हों गोलियां खाकर
उसे कुछ लोग गाली दे रहे,
हैं पानी पी पीकर,
जिसे भँवरे सुनाते हों
मधुर संगीत गा गाकर। १।
जगत में शान है जिसकी,
तिरंगे में पिरोई हो,
दुश्मनों की तनी आँखें,
रक्त के आँस रोई हों,
कि जिसने राम मंदिर को,
बनाने की शपथ खाई,
हटाया ना कदम पीछे,
वहीं पर नींव डलवाई,
हिमालय से बड़ा सीना,
गर्व है आज भारत पर,
जिसे भँवरे सुनाते हों,
मधुर संगीत गा गाकर। २।
जिसने भब्य भारत की,
लुटी गरिमा को लौटाया,
सभी देशों में हिन्दुस्तान का,
डँका बजा आया,
अकड़ की चीन की ढीली,
वो भारत का यशस्वी है,
सिखाया शान से जीना,
आज प्रधान मन्त्री है,
नमन् अरविंद करता है,
सुधारस आज पी पीकर,
जिसे भँवरे सुनाते हों,
मधुर संगीत गा गाकर। ३।
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| अरविंद जायसवाल |


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