maa par panktiya
माँ की याद मे कविता /वर्षिका सिंह
 |
| माँ की याद मे कविता |
तेरे हाथों
के संवारने से,मेरा
बचपन सँवर गया।
तेरी पलकों
में ही,अब
मेरा घर बन
गया।
मैं जानती
हूँ माँ,मैंने
आपको बहुत तंग
किया।
पर फिर
भी, आपने मेरा
ही साथ दिया।
माँ मुझे
वो लम्हें,वो
खूबसूरत सी वादिया
आज भी सपनो
में आती हैं,
जब आप
मेरी उंगली पकड़
कर मुझे घुमाती
थी।
हॉ,सच
ही कहते है
लोग,
माँ भगवान
से भी बढक़र
होती हैं।
जो खुद
जमीन पर सो
कर,
हमे छाती
से लगाकर सुलाती
है।
वो पूरी
रात जगकर हमे
थपकियां देती है।
और ,फिर
सुबह जल्दी उठ
जाती है।
हाँ माँ,
मुझे आज भी
याद है,
की
आप देर रात
काम करके भी,
हमारा टिफिन
समय से तैयार
करती थी।।
 |
| वर्षिका सिंह |
अन्य कविता पढ़े :
आपको maa par panktiya- माँ की याद मे कविता /वर्षिका सिंह की हिंदी कविता कैसी लगी अपने सुझाव कमेन्ट बॉक्स मे अवश्य बताए अच्छी लगे तो फ़ेसबुक, ट्विटर, आदि सामाजिक मंचो पर शेयर करें इससे हमारी टीम का उत्साह बढ़ता है।
हमें विश्वास है कि हमारे लेखक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस लेखिका का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।लेखिका की बिना आज्ञा के रचना को पुनः प्रकाशित’ करना क़ानूनी अपराध है |आपकी रचनात्मकता को हिंदीरचनाकार देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए help@hindirachnakar.in सम्पर्क कर सकते है| whatsapp के माद्यम से रचना भेजने के लिए 91 94540 02444, संपर्क कर कर सकते है।
Waah !!
जवाब देंहटाएंBahut hi acha
जवाब देंहटाएं