मंगलवार, 15 दिसंबर 2020

maa par panktiya- माँ की याद मे कविता /वर्षिका सिंह

 

maa par panktiya 

माँ की याद मे कविता /वर्षिका सिंह

maa- par- panktiya
माँ की याद मे कविता 


तेरे हाथों के संवारने से,मेरा बचपन सँवर गया।

तेरी पलकों में ही,अब मेरा घर बन गया।

मैं जानती हूँ माँ,मैंने आपको बहुत तंग किया।

पर फिर भी, आपने मेरा ही साथ दिया।

माँ मुझे वो लम्हें,वो खूबसूरत सी वादिया 

आज भी सपनो में आती हैं,

जब आप मेरी उंगली पकड़ कर मुझे घुमाती थी।

हॉ,सच ही कहते है लोग,

माँ भगवान से भी बढक़र होती हैं।

जो खुद जमीन पर सो कर,

हमे छाती से लगाकर सुलाती है।

वो पूरी रात जगकर हमे थपकियां देती है।

और ,फिर सुबह जल्दी उठ जाती है।

हाँ माँ, मुझे आज भी याद है,

 की आप देर रात काम करके भी,

हमारा टिफिन समय से तैयार करती थी।।

maa- par- panktiya
वर्षिका सिंह


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