गुरुवार, 3 दिसंबर 2020

maa par kavita by aastha srivastava/ माँ कविता आस्था श्रीवास्तव

 maa par kavita by aastha srivastava



माँ

maa- par- kavita -by- aastha- srivastava


 

तू चिल्ला भी दे

तो भी वो शांत होती है,

पर तुझपे आजाए आँच अगर,

फिर वो भगवान से भी लड़ जाती है।

क्यूँकि माँ तो माँ होती है।

 

 

सुबह सबसे पहले जागती है

और रात को देर से सोती है,

तुझे दुख हो,तो तक्लीफ़ उसे भी होती है।

क्यूँकि माँ तो माँ होती है।

 

कमर का दर्द,घुटने की तक्लीफ़ सम्भाले ,

सारा दिन मुस्कुरा कर सबकी सुनती है।

क्यूँकि माँ तो माँ होती है।

 

 

एक बिंदी और नेल पैंट लगा कर तैयार हो जाती है,

फिर कर दो ज़रा सी तारीफ़ अगर,तो फूले नही समाती है।

क्यूँकि माँ तो माँ होती है।

 

अपनी ज़रूरतें छोड़

तुम्हारी ख्वाहिशें पूरी करती है,

खुद भूकी हो फिर भी,

रोटियाँ पहले तुम्हें खिलाती है

क्यूँकि माँ तो माँ होती है।

 

तुम्हारी पसन्द को पसन्द करती है,

तुम्हारे झूँठ को कवर करती है।

क्यूँकि माँ तो माँ होती है।

 

जो तुम्हारे सपनो के लिए,

तुम्हारे साथ साथ चलती है,

जो तुम्हारे एक इशारे पे,

ज़िन्दगी का कमाया तुम्हारे नाम कर देती है

कोई और नही वो सिर्फ़ माँ कर सकती है।

 

सब जान के वो अंजान बनती है,

फ़ोन हमेशा ऑफ़ रखती है,

कभी कभी तो फ़ोन ही नही रखती है।

क्यूँकि माँ तो माँ होती है।

 

बिजी होके भी १० बार कॉल करती है,

ऑफ़िस से आते, पेटीज साथ लाती है।

क्यूँकि माँ तो माँ होती है।

 

इमोशनल ड्रामा हर बार करती है,

रो रो के सारे काम करवा लेती है।

क्यूँकि माँ तो माँ होती है।

 

अनुपमा की बहुत बड़ी फ़ैन लगती है,

दो हाथों से दुनिया के सारे काम करती है।

क्यूँकि माँ तो माँ होती है।

 

जो हर लिबास में क़यामत ढाती है,

जो हाथ उठाती है, तो सिर्फ़ आशीर्वाद देती है।

वो माँ ही होती है।

 

१० माँगो तो १०० देती पकड़ा देती है,

खर्चा ना करने की नसिहत भी देदती है।

क्यूँकि माँ तो माँ होती है।

 

जो कहती है तेज मत चलाना गाड़ी,

गिरी अगर तो तोड़ देंगे हड्डियाँ सारी,

ये कहते कहते जो खुद रो देती है।

वो कोई और नही सिर्फ़ माँ होती है।



 

बहुत ही भोली बहुत ही प्यारी,

मासूमियत ही मासूमियत जिसमें हो भरी,

वर्णन उसका शब्दों में सम्भव ही नही,

क्यूँकि माँ उस भगवान से भी, होती है बड़ी।

 

 

क्यू घूमता है गली गली,

दर्शन कर ईश्वर के, घर में ही,

माँ को दुख ना देना कभी,

सब कुछ होके भी, नही रहेगा सुखी।

 

maa- par- kavita- by -aastha -srivastava
आस्था श्रीवास्तव  

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