hindi kavita prem ka path
प्रेम
का
पथ
प्रेम है पथ समर्पण का
प्रेम है पथ अर्पण का
प्रेम है पथ त्याग का
प्रेम ही पथ जीवन का
प्रेम सृष्टि का भाग है
प्रेम है पथ रस का है
प्रेम बिना सब विरस है
प्रेम मीरा कबीर की बानी है
प्रेम सूर तुलसी की कहानी है
प्रेम के सागर में
रसखान ने गोता लगाया
और श्याम रूपी मोती पाया
प्रेम ही जीवन का सार है
प्रेम ही अभिसार है
प्रेम साधना है
प्रेम ईश्वर की आराधना है
प्रेम जीवन का रंग है
प्रेम जीवन का ढंग है
प्रेम है तो
पूरी कायनात संग है
प्रेम हनीमून है
प्रेम नहीं तो
न हनी है
न मून है
अपने जीवन में
प्रेम के ढाई आखर
जिसने उतार लिया
उसने इस संसार से
पार पा
लिया
2. अब नहीं चला जा रहा है!
जिस पड़ाव पर हूं
जिस हाल में हूं
जिस अवस्था की छत पर
मैं खड़ा होकर देख रहा हूं
यहां से बाहर की दुनिया
देखने पर झांई आती है
अतीत के संबंधों की
मधुर स्मृतियों की बाहें पकड़कर
यहां तक तो चला आया
लेकिन अब लड़खड़ा रहा हूं
टूटे मन से थके तन से
पांव को ढोए जा रहा हूं!
अब नहीं चला जा रहा है
लगा रहता है डर कि
मधुर- स्मृतियों की बांहें
मुझे मझधार में ही न छोड़ दें
वर्तमान ज़िन्दगी के
पथ की मेरी नैया
आत्मीय संबंधों की
गंगा में डूब रही है
किससे बचाने की गुहार लगाऊं
किसे मैं पुकारूं !
संसार के बाजार की
स्वार्थ- गंगा में
हर आदमी डूबा हुआ है
उस घाट कैसे मैं जाऊं
अब नहीं चला जा रहा है
किसे मैं पुकारूं !
यहां तो सबको
अपने पैरहन की पड़ी है
3. गर्दन बकरे की
खेत-खलिहानों को छोड़कर
अपने घर से बहुत दूर
सर्द हवाओं को पीते हुए
चेहरे पर कुदरत की असंख्य
खींची हुई अमिट
रेखाओं की लकीर
मिटाने के लिए
निकल पड़े हैं
पुनः शहर की ओर
कुछ मजदूर
नहीं डर है अब
हांलांकि वे जानते हैं
जीवन और मृत्यु में उनके
बस कसाई के गड़ासे
और बकरे की गर्दन
की ही दूरी है
![]() |
| संपूर्णानंद मिश्र के बारे मे जाने |
अन्य कविता पढ़े :
आपको hindi kavita prem ka path प्रेम का पथ/संपूर्णानंद मिश्र की रचना कैसी लगी अपने सुझाव कमेन्ट बॉक्स मे अवश्य बताए अच्छी लगे तो फ़ेसबुक, ट्विटर, आदि सामाजिक मंचो पर शेयर करें इससे हमारी टीम का उत्साह बढ़ता है।
हिंदीरचनाकार (डिसक्लेमर) : लेखक या सम्पादक की लिखित अनुमति के बिना पूर्ण या आंशिक रचनाओं का पुर्नप्रकाशन वर्जित है। लेखक के विचारों के साथ सम्पादक का सहमत या असहमत होना आवश्यक नहीं। सर्वाधिकार सुरक्षित। हिंदी रचनाकार में प्रकाशित रचनाओं में विचार लेखक के अपने हैं और हिंदीरचनाकार टीम का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है।|आपकी रचनात्मकता को हिंदीरचनाकार देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए help@hindirachnakar.in सम्पर्क कर सकते है| whatsapp के माद्यम से रचना भेजने के लिए 91 94540 02444, ९६२१३१३६०९ संपर्क कर कर सकते है।



कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
सभी साथियों से अनुरोध है कि यदि आपकी मातृभाषा हिंदी है,
तो यहाँ अपनी टिप्पणी भी हिंदी (देवनागरी लिपि)
में ही प्रकाशित करने की कृपा कीजिए!
टिप्पणी पोस्ट करने से पहले
ई-मेल के द्वारा सदस्यता ले लिया कीजिए,
ताकि आपकी टिप्पणी प्रकाशित होने के बाद में यहाँ होनेवाली चर्चा का पता भी आपको चलता रहे और आप बराबर चर्चा में शामिल रह सकें!