रविवार, 13 दिसंबर 2020

apana prakaash apana prakaash/ सृष्टि कुमार श्रीवास्तव

 apana prakaash apana prakaash

अपना प्रकाश अपना प्रकाश

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चाहे चट्टाने लाख अड़े या

और किसिम की बाधा हो।

वह सरिता कैसे रुक जाये

जिसका सागर से वादा हो।

 

यह ठीक हुआ हम विछड़ गये

इस भीड़ भाड़ के रेले से।

निज सूनेपन का आकर्षण

कम नही किसी भी मेले से।

 

उसका विश्वास कम होगा

जिसने श्रदधा को साधा हो।

 

वह सरिता कैसे रुक जाये

जिसका सागर से वादा हो।

 

तबियति से लेकर अंगडाई

चल पड़ा मुसाफिर राह नई

खुद दीपक बनकर जलना है

यह बात समझ मे ही गई

 

जो खुद पर वश वो क्या देगा

शशि पूरा हो या आधा हो।

 

वह सरिता कैसे रुक जाये

जिसका सागर से वादा हो।

 

सूरज केवल दिन का साथी

ये चांद सितारे निशि भर के।

ये भला रोशनी क्या देंगे

जुगनू बेचारे खण्डहर के।

 

अपना प्रकाश अपना प्रकाश

वह थोडा हो या ज्यादा हो।

 

वह सरिता कैसे रुक जाये

जिसका सागर से वादा हो

apana- prakaash- apana -prakaash
सृष्टि कुमार श्रीवास्तव

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