शनिवार, 28 नवंबर 2020

Poem on World Sparrow Day-विश्व गौरैया दिवस पर कविता गौरैया मेरी /शैलेन्द्र कुमार

  Poem on World Sparrow Day

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पिछले कुछ सालों में शहरों में गौरैया की कम होती संख्या पर चिन्ता प्रकट की जा रही है। आधुनिक स्थापत्य की बहुमंजिली इमारतों में गौरैया को रहने के लिए पुराने घरों की तरह जगह नहीं मिल पाती। Poem on World Sparrow Day सुपरमार्केट संस्कृति के कारण पुरानी पंसारी की दूकानें घट रही हैं। इससे गौरेया को दाना नहीं मिल पाता है। इसके अतिरिक्त मोबाइल टावरों से निकले वाली तंरगों को भी गौरैयों के लिए हानिकारक माना जा रहा है। ये तंरगें चिड़िया की दिशा खोजने वाली प्रणाली को प्रभावित कर रही है और इनके प्रजनन पर भी विपरीत असर पड़ रहा है जिसके परिणाम स्वरूप गौरैया तेजी से विलुप्त हो रही है।गौरैया को घास के बीज काफी पसंद होते हैं जो शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से मिल जाते हैं। ज्यादा तापमान गौरेया सहन नहीं कर सकती। प्रदूषण और विकिरण से शहरों का तापमान बढ़ रहा है। कबूतर को धार्मिक कारणों से ज्यादा महत्त्व दिया जाता है। चुग्गे वाली जगह कबूतर ज्यादा होते हैं। पर गौरैया के लिए इस प्रकार के इंतज़ाम नहीं हैं। खाना और घोंसले की तलाश में गौरेया शहर से दूर निकल जाती हैं और अपना नया आशियाना तलाश लेती हैं। गौरैया के बचाने की कवायद में दिल्ली सरकार ने गौरैया को राजपक्षी घोषित किया है। प्रस्तुत है रायबरेली के प्रतिभाशाली लेखक   शैलेन्द्र कुमार की कविता गौरैया मेरी हिंदुस्तान की जनता को समर्पित है । 

गौरैया मेरी 

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गौरैया मेरी

घूमे डाली डाली मैं सोचूंँ क्यों है घोसला खाली?

गौरैया मेरी |

 

मैं रोकूंगा मैं टोकूंगा

चाहे जिस फूल पर बैठे

चाहे जहांँ तू उड़ जाए

तू है मुझको जान से प्यारी

गौरैया मेरी |

 

तू हरदम चहके

तेरे बदन की खुशबू से सारी बगिया महके

कहांँ छुप गई?

तुझको खोजूं क्यारी क्यारी

गौरैया मेरी |

 

 

कहाँ है?

गौरैया मेरी

छोड़ गयी वो मुझको निपट अकेला

भूल गई कसमें भूल गयी वो बातें सारी

 

नहीं जानना..नहीं जानना.. नहीं जानना..

कहाँ है?

गौरैया मेरी |

पढ़े शैलेन्द्र कुमार की अन्य कविताएं : घर की याद  

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शैलेन्द्र कुमार


केंद्रीय विद्यालय रायबरेली

मोबाइल नंबर 739835681 

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2 टिप्‍पणियां:

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