Poem on World Sparrow Day
गौरैया मेरी
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गौरैया मेरी
घूमे डाली डाली मैं सोचूंँ क्यों है घोसला खाली?
गौरैया मेरी |
मैं न रोकूंगा मैं न टोकूंगा
चाहे जिस फूल पर बैठे
चाहे जहांँ तू उड़ जाए
तू है मुझको जान से प्यारी
गौरैया मेरी |
तू हरदम चहके
तेरे बदन की खुशबू से सारी बगिया महके
कहांँ छुप गई?
तुझको खोजूं क्यारी क्यारी
गौरैया मेरी |
कहाँ है?
गौरैया मेरी
छोड़ गयी वो मुझको निपट अकेला
भूल गई कसमें भूल गयी वो बातें सारी
नहीं जानना..नहीं जानना.. नहीं जानना..
कहाँ है?
गौरैया मेरी |
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केंद्रीय विद्यालय रायबरेली
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