chhand kavita
छंद-शारद
गाते
रहें
निज
गीत
में
परिचय-अष्टदशाक्षरावृत्ति
यति-9 ,9
गण विन्यास-त भ र स ज ज
संयोजन-
221-211-212,112-121-121
वे आज कानन जा रहे, करते सभी जन शोर।
आओ चलें सब साथ में, चलते चलें उस ओर।।
खोना नही हमको कभी,मलना नहीं निज हाथ।
वे सार जीवन प्राण हैं, तजना न संभव साथ।।
वे इष्ट हैं हम जीव हैं, मिलता भला कब चैन।
त्यागें नहीं हम चाहते,नित राख लें निज नैन।।
जैसे रहे वह सूर्य है,दिन-रैन ही दिन रैन।
या साथ में नित साथ है,बन कामना हिय मैन।।
साथी वही इस देह के,जग जानता यह बात।
जो जीव हैं इस भूमि के, सबके वही निज गात।।
बोलो सहे तब क्यों भला,उनका विछोह अपार।
जो नित्य जीवन सार हैं, नित नव्य जीवन धार। ।
आधार हैं निज प्राण के,इन जीव के सुख सार।
जो जानता यह बात है,करता सदा जयकार। ।
आओ गहो हृदयेश जी,निज भक्त के सुविचार,
गाते रहें निज गीत में, नित रीतता घन प्यार।
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