moral story in hindi
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हेलमेट
गंगानदी की गोद मे बसे श्याम नगर गाँव में अर्जुन और शेखर रहते थे। शेखर एकलौता घर का लाडला था। इसलिए अपने माता-पिता का राजदुलारा और आँखों का तारा था। अर्जुन और शेखर घनिष्ठ मित्र थे, दोनों अधिकतर समय साथ में ही व्यतीत करते थे । ये दोनों एक दूसरे के घरों और रिश्तेदारों के यहाँ आया-जाया करते थे। अर्जुन आर्थिक रूप से कमजोर था, परन्तु मेहनतकश ईमानदार युवक था। वह जब भी मोटरसाइकिल पर कहीं जाता था तो खुद की सुरक्षा और पुलिस के डर के कारण हेलमेट जरूर पहनता था। वहीं शेखर लम्बी-चौड़ी कद काठी वाला आर्थिक रूप से सम्पन्न युवक था, जिसे लंबे बाल रखने का शौक था। इसलिए यह कभी भी हेलमेट नहीं पहनता था कि कहीं उसके बाल न खराब हो जाये। शेखर के पिता पूंजीपति, ऊँची पहुँच वाले सत्ताधारी नेता थे, इसलिए शेखर को पुलिस का भी डर नहीं था। अर्जुन अक्सर अपने मित्र शेखर को समझाया करता था कि बाइक चलाते समय हेलमेट जरूर पहना करो और गति भी कम रखा करो।
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यद्यपि दोनों पढ़ने में अव्वल और कुशाग्र बुद्धि वाले थे। फिर भी अर्जुन अपने मित्र को समझाया करता था कि सरकारी नौकरी पाने के लिए बहुत पढ़ाई करनी पड़ेगी। तब शेखर अतिउत्साही होकर अहंकार की भाषा में कहता है कि मेरे पिता जी रसूखदार हैं। गाँव के थाने से लेकर राजधानी तक रूतबा है। पिताजी मेरे लिए कोई भी नौकरी खरीद सकते हैं। अर्जुन भी आप तो जानते ही हो, यदि किसी व्यक्ति को मैं मारपीट भी देता हूँ तो एक फोन से मैं थाने से दोषमुक्त हो जाता हूँ। एक दिन दोनों मित्र प्रातःकाल सरकारी नौकरी के लिए इंटरव्यू देने लखनऊ जा रहे थे। सूर्य की लालिमा और रास्ते में प्राकृतिक छटा दोनों का मन मोह रही थी। अर्जुन मध्यम गति में मोटरसाइकिल चला रहा था। गर्गऋषि के आश्रम के पास दोनों नाश्ता करने लगे थे। लखनऊ पहुँचने और इंटरव्यू देने का समय भी नजदीक आ रहा था। जलपान करने के बाद शेखर ने कहा- तुम्हें बाइक चला कर मैं दिखाता हूँ, कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। मोटरसाइकिल शेखर चलाने लगा और सीट में पीछे बैठे हुए अर्जुन को हेलमेट पकड़ा दिया। शेखर लम्बे केशों को हवा में बिखेरते हुए मोटरसाइकिल चलाने में खुद को सलमान खान समझकर मानो हवा से बातें कर रहा था। मोहन लालगंज के पास सुल्तानपुर की ओर से आ रहे ट्रक से तेज रफ़्तार मोटरसाइकिल में धड़ाम की आवाज के साथ भिड़ंत हो गयी। अर्जुन उछलकर गहरी खाई में गिर पड़ा। शेखर सड़क पर ही गिर गया, जिससे उसके सिर में गहरी चोट आई। दोनों को अस्पताल पहुँचाया गया। सूचना पाकर नेता जी भी लावलश्कर के साथ अस्पताल पंहुच गए थे। अब तो अस्पताल का पूरा महकमा इलाज करने में लग गया था। अधिक रक्तस्राव होने के कारण कुछ समय में शेखर की दर्दनाक मृत्यु हो गई।
आज की कहानी की सीख
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| अशोक कुमार गौतम |
सरयू-भगवती कुंज
अशोक कुमार गौतम
असिस्टेंट प्रोफेसर, साहित्यकार
शिवा जी नगर (दूरभाष नगर)
रायबरेली
Mob 9415951459
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अति उत्तम प्रेरक कहानी। इसका नाट्य रूपांतरण होना चाहिये
जवाब देंहटाएंप्रणाम सर अवश्य इसका नाटय रूपांतरण होना चाहिए क्योंकि सरकारी आकड़ो के अनुसार लगभग 12 लाख लोगों की मृत्यु और 5 करोड़ लोग इसके कारण इस वर्ष घायल हुए हैं। इसमें से सबसे अधिक मौतें 10 से 19 वर्ष के लोगों के हुए हैं।
हटाएंSir ki story insprinational hai mai rajasthan se hoo sir ko pehele lekh se follow kar hoo
जवाब देंहटाएंश्री नरेन्द्र चौहान जी,
हटाएंआपने मुझे प्रोत्साहित किया है, मेरे विचारों/लेखों को मन से पढ़ते हैं, मुझे फॉलो करते हैं।
जिसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद और आभार