गुरुवार, 17 सितंबर 2020

sawan geet - सावन तेरे आँगना -पुष्पा श्रीवास्तव शैली

 sawan geet - सावन तेरे   आँगना -पुष्पा श्रीवास्तव शैली


sawan geet - सावन- तेरे  - आँगना -पुष्पा श्रीवास्तव शैली
पुष्पा श्रीवास्तव शैली



कह गया मुझसे सावन,न रूठो सखी।
आऊंगा ले कर  बादल तेरे    आँगना।
सूखी धरती में बस प्यार  बो दूंगा मैं।
खतखटाऊंगा  सांकल तेरे  आँगना।


हाथ में रंग मेंहदी चढ़ा लो सखी  ।
बाल में एक गजरा सजा लो सखी।
चूड़ियां भी हरे रंग की ही   बजें,
चूनरी में भी गोटा  लगा लो सखी।


आते ही उनको संदेश दे दूंगा मैं ।
आऊंगा लेकर काजल तेरे आँगना।

भीगना फिर चहक कर मेरी गोद मे।
झूलना फिर बहक कर मेरी गोद में।
बावरी मैं सखा बालपन का तेरे।
झूमना फिर उछल कर मेरी गोद मे

संग सखा मीत सबको भिगो दूंगा मैं।
आऊंगा लेकर पायल तेरे  आँगना  ।

तुम ना मानी तो फिर मैं चला  जाऊंगा।
फिर किसी गांव में जा छला जाऊंगा।
मुझको गह लो हृदय में बसा लो सखी।
जाऊंगा फिर तो अगले बरस   आऊंगा।

देखो अब तो विकल होके रो दूँगा मैं।
आऊंगा हो के पागल तेरे   आँगना  ।।

        पुष्पा श्रीवास्तव शैली।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

सभी साथियों से अनुरोध है कि यदि आपकी मातृभाषा हिंदी है,
तो यहाँ अपनी टिप्पणी भी हिंदी (देवनागरी लिपि)
में ही प्रकाशित करने की कृपा कीजिए!
टिप्पणी पोस्ट करने से पहले
ई-मेल के द्वारा सदस्यता ले लिया कीजिए,
ताकि आपकी टिप्पणी प्रकाशित होने के बाद में यहाँ होनेवाली चर्चा का पता भी आपको चलता रहे और आप बराबर चर्चा में शामिल रह सकें!