शनिवार, 12 सितंबर 2020

khyal poem by astha srivastava- " ख़्याल"-हिंदीं कविता,

khyal poem by astha srivastava-  " ख़्याल"- हिंदीं कविता,
khyal poem by astha srivastava- " ख़्याल"-हिंदीं कविता,

" ख़्याल"-हिंदीं कविता


कहने को तो सब कहते है
ज्ञान समाज में सब देते है।

कैंडल कभी तो कभी पुतला फूंकते है

उसी भीड़ में खड़े वे अगला शिकार ढूँढते है।

बातें ऐसी की नज़र उठाके नही देखते,
सच पूछो घर में यही महिलाओं का शोषण करते।

देखना कौन सा गुनाह है भाई रेप थोड़ी कर दिया?
इतनी गंदी नज़रें है, तुमने तो आँखो से ही उसको नंगा कर दिया।

कपड़े छोटे, समाज ओर दुनिया दारी पढ़ाते हो,
तुम किस दुनिया से आए हो?
औरत की कोख से जन्म लेके उसी को गाली देते हो,
कुछ ओर नही तुम कितने नीच हो ये दिखाते हो।

लड़कियाँ तो कैरिक्टर लेस होती है,
अनजान हूँ ज़रा बताना तो,उसकी डेफ़िनिशन क्या होती है?

मर्द हूँ मर्द.......
शादी में भीख माँगते वक़्त ये मर्दानी कहा घुस जाती है?

“औरतों को पर्दे में रहना चाहिए”, 
बात तो सही है,
वैसे सुना है आजकल छोटा सा मास्क लगाने से कुछ मर्दों की साँसे अटक सी जाती है।

हँसके बोलदे बात कर ले तो लड़की ऐसी ही है,
फिर उसको छुआ तो भैया इनकी मर्ज़ी है।

आज की लड़की कल की नारी है,
सम्भाल रही तुझे ओर तेरे घर को सोच तू कितना भाग्यशाली है।

दिन के उजालो में बाज़ारू औरत से घिन आती है,
रात के अंधेरे में उसके पास जाने किन लोगों की मंडली लग जाती है।

मूर्ख है
वे जो नारी का करते नही सम्मान
ऐसे घरों में तो ईश्वर भी नही करते निवास।

धर्म समाज पे चलने को बोलते हो,
खुद कि आचरण कभी देखे हो?

 

बातें कड़वी है पर सत्य है।

6 टिप्‍पणियां:

  1. Bahut badiya.....ladkiyo ki izzat karne lage sab to rape jaisi soch kabhi nhi ayegi😓🙏

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  2. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. मैं निशब्द हूं आपकी यह कविता पढ़कर इतने खुले और साफ शब्दों में शायद ही मैंने ऐसी कोई कविता पढ़ी होगी🌼🌺

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  4. Most important quotes 😊
    You showed the society it's mirror🙂

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