शुक्रवार, 11 सितंबर 2020

motivational dohe in hindi-जय चक्रवर्ती के दोहे-दोहे हिंदी

 

जय चक्रवर्ती के दोहे
motivational dohe in hindi-जय चक्रवर्ती के दोहे-दोहे हिंदी
जय चक्रवर्ती


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अपने हिस्से का समय, नहीं सके जो बाँच
अर्थहीन उनका सृजन, झूठ रचें या साँच.

नहीं निरंकुश वक़्त को, कभी सके जो टोक
कह दो उनसे लेखनी, रख दें वे डरपोक.

कवि तो बहता है सदा, धारा के विपरीत
बनना है जिसको बने , राजमहल का मीत.

एक फर्श पर कब तलक, बदलोगे कालीन
नए सृजन के वास्ते, ढूंढो नई जमीन.

जो कुछ कहना था कहा, मुँह पर सीना तान
एक आइना उम्र भर, मुझमें रहा जवान.

मैं न रहूँगा, पर यहाँ, होंगे मेरे शब्द 
जैसे काली रात में, हो प्रकाश उपलब्ध.

मैं हँसता हूँ ओढ़कर, सिर पर दुख का ताप
इनमें या उनमें कभी, मुझे न ढूंढें आप.   

   
  जय चक्रवर्ती

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