मंगलवार, 10 नवंबर 2020

करतब -Stunt hindi motivational story

 करतब (Stunt)

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करतब (Stunt)





   राम किशुन की कस्बे में छोटी सी परचून की दुकान थी, जिससे परिवार का भरण-पोषण करता था। वैश्विक महामारी कोरोना के कारण सम्पूर्ण विश्व के साथ साथ उसकी भी अर्थव्यवस्था चौपट हो गयी थी। वह प्रतिदिन साइकिल से दुकान आता-जाता था। राम किशुन के 3 पुत्रियाँ और एक पुत्र था। लड़के और लड़कियों में भेदभावपूर्ण व्यवहार प्राचीनकाल से ही चला आ रहा है। इसी पूर्वाग्रसित मानसिकता के कारण वह अपनी बेटियों का दाखिला गाँव के सरकारी स्कूल में करा देता है, जबकि बेटे अजय को कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने भेजता था। अजय हाईस्कूल उत्तीर्ण करने के बाद कस्बे के नामी गिरामी पब्लिक स्कूल में पढ़ने लगा था। अजय के मित्रगण धनाड्य परिवार से होने के कारण मोटरसाइकिल से स्कूल आते थे, जबकि उसके पास पुरानी साइकिल थी। वह दोस्तों के सामने खुद को अपमानित सा महसूस करता था। राम किशुन के पास इतनी धनराशि न थी कि मोटरसाइकिल खरीद सके। फिर भी अजय बार-बार पिता जी से जिद किया करता था।

     राम किशुन ने बेटे की खुशी के लिए गाँव के महाजन से ब्याज पर रूपये लेकर मोटरसाइकिल खरीद दी। अब अजय भी मित्रों संग सड़क पर फर्राटे भरने लगा।

    करतब (स्टंट) करना उसका शौक बन गया था। कई बार पुलिस ने अजय की मोटरसाइकिल का चालान भी किया। पिता जी जुर्बाने की धनराशि देते-देते आर्थिक रूप से टूटते जा रहे थे, इसलिए राम किशुन अपने बेटे को स्टंट करने को मना किया करते थे। अब तो अजय को उसके पिता की बातें तीखी लगने लगी थी। अजय दिन प्रतिदिन पढ़ाई के प्रति लापरवाह होता जा रहा था। उसके माता-पिता को चिंता खाये जा रही थी।

    वह मित्रों के साथ पुलिस कर्मियों को भी चकमा देने में माहिर हो गया था। गरीबी के कारण राम किशुन अब भी महाजन का रुपया नहीं लौटा पा रहा था। धंधा में मंदी के कारण भोजन के लाले थे। महाजन भी आएदिन धमकी और अपशब्दों का प्रयोग करने लगा था।

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करतब हिंदी कहानी


   एक दिन देर शाम राम किशुन दुकान बंद करके साइकिल से घर लौट रहे थे। सामने से अजय तेज रफ़्तार से करतब दिखाते हुए चला जा रहा था, मानो साक्षात यमराज की सवारी जा रही हो। अनियंत्रित होकर मोटरसाइकिल उसके पिता की साइकिल से टकरा गई, दोनों सड़क पर धड़ाम से गिर पड़े। राम किशन के सिर पर गहरी चोट लगी। राहगीरों ने एम्बुलेंस को कॉल किया, पर वह भी समय पर न पहुँची। पिता-पुत्र घायल पड़े थे। कुछ देर बाद घटनास्थल पर ही राम किशुन ने दम तोड़ दिया। तब अजय को अपनी गलतियों का अहसास हुआ। परिवार का बोझ उसके कंधे पर आ गया था। उसे अपने ज्यादा बहनों के जीवन और पढ़ाई की चिंता थी। पिता की असमय मृत्यु के कारण अब अजय बदल चुका था। अपने जीवन को अंधकार में रखकर बहनों के जीवन में सुख और ज्ञान का प्रकाश भर दिया।

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अशोक कुमार गौतम




अशोक कुमार गौतम

प्राध्यापक, कुलानुशासक

शिवा जी नगर (दूरभाष नगर)

रायबरेली (उप्र)

मो0 9415819451

6 टिप्‍पणियां:

  1. अशोक सर को हृदय तल से आभार की आपने सूंदर प्रेरणा दायक कहानी लिखी

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    1. धन्यवाद भाई अभिमन्यु जी,हम जैसे हिंदी प्रेमियों और समाज के शुभचिंतकों को लेखन के लिए नया मंच प्रदान किया है। आभार

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  2. सुन्दर बेहद सुन्दर लेख 🙏👌👌👌

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