मंगलवार, 10 नवंबर 2020

कविता दस्तक/ सीताराम चौहान पथिक- dastak hindi kavita

 dastak hindi kavita

Dastak-hindi-kavita
दस्तक





  दस्तक 


वक्त ने दी है ये  दस्तक ,

ज़िन्दगी  के द्वार  पर  । 

बज कर अलार्म कह रहा , 

इन्सानियत  से  प्यार कर । 


छोड़ दें  जुल्मों - सितम , 

तू एक दिन पछताएगा । 

कोई ना  होगा  साथ   , 

अपने आप  से डर जाएगा । 


आएगा एक दिन  भी  वो ,

टकराएगा जब  मौत  से । 

तब बहुत तकलीफ़  होगी , 

तौबाह  कर  उस  खौफ से । 


अपने दामन को  ना  रंग  , 

इन्सानियत  के  खून  से । 

ज़मीर  को जख्मी  ना कर  , 

वहशी  बने  जुनून  से   । 


हर  तरफ  बर्बादियों  के  , 

कहर  ढाता  जा रहा  है  । 

कौनसा  मज़हब  है  तेरा , 

जो  तुझे सिखला रहा  है । 


हर मज़हब  इन्सानियत की , 

राह पर  चलना  सिखाता । 

 यही   है   वो  रास्ता    जो  , 

खुदा के  नजदीक  लाता  । 


क्यों मज़हब के नाम पर  , 

मासूम  के  घर को जलाता । 

खूबसूरत  है  ये  दुनिया   , 

 ये  चमन    जिसको मिटाता ‌ । 


अल्लाह  के  गुमराह  बच्चे  , 

अल्लाह  की  लाठी  से डर  । 

बे - शक   ये--बे - आवाज है , 

तड़पाएगी  बस  याद  कर । 


वक्त  ने अब  दी है दस्तक , 

मत उलझ शैतानियों  में  । 

वरना  तेरी  दास्तां ------  , 

 मिट  जाएगी  गुमनामियों में । 

Dastak-hindi-kavita
  सीताराम चौहान पथिक



+91-  9650621606 

        सीताराम चौहान पथिक

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