Yaad hindi GHAZAL
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| ममता सिंह |
याद से
याद में आँख की बस, पहल देखिए
हुये कैसे नयन यह,सजल देखिये।
दूसरो को पिलाते रहे हम सुधा
खुद पीते रहे है गरल देखिये।
फिक्र उनको न थी,मेरी कोई यहाँ
कर रहे ज़िन्दगी भर खलल देखिये।
दिल से करीब कोई बिछुड़ता अगर
दुःख होता है कितना प्रबल देखिये।
उभरती है छवि आंसूओ मे यहाँ
कल्पनाओं का सजता महल देखिये।
था कठिन पंथ मेरा जो इजहार का
वह कितना हुआ है सरल देखिये।
खुशियों की महफिल होगी यहाँ पर
इरादो को मेरे सवल देखिये।
बोझ खुद जिंदगी यह 'ममता' लगे जब
गुनगुनाती हुयी तब गजल देखिये ।
ममता सिंह
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बहुत सुंदर ग़ज़ल धन्यबाद लेखिका का
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