मंगलवार, 17 नवंबर 2020

सोशल मीडिया पर कविता - poetry in social media- शैलेन्द्र कुमार

poetry in social  media

poetry- in- social- media


 सोशल मीडिया

 


कोई मंच ऐसा हो 

कोई जगह ऐसी हो 

जहाँ  साझा कर सकें सुख 

जहाँ व्यक्त कर सकें पीड़ा 

जहाँ रो सकें मन भर 

जहाँ मुस्करा सके निसंकोच

जहाँ हँस सकें दिल खोलकर

कह सकें हृदय की बात।


जहाँ 

अपने गमों को 

अपनी खुशियों को 

अपने मनोभावों को 

अपनी मनोदशा को 

अपने अपराध

अपनी कमजोरियां 

शेयर करें बेधड़क...

कह सके कान में कह सकने वाली बात 

खोल सके अनकहे राज।


लाइक की लालसा नहीं मुझे 

कमेंट पर भी जोर नहीं 

दिल में जो है

(सच में जो है दिल में बेहिचक बयाँ कर सकें) 

क्या ऐसी जगह है कहीं?


सोशल मीडिया... 

व्हाटस एप ? 

फेसबुक ? 

ट्विटर ?

इंस्टाग्राम?

कहाँ है वह जगह??

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शैलेन्द्र कुमार  

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