napharat ka koee bhavishy nahee
नफरत का कोई भविष्य नही
सविनय सादर संसार सुने
इक बात जरूरी कहनी है।
इतने रिश्तों का क्या मतलब
जब पीर अकेले सहनी है ।
नि:शब्द हो रहे रिश्तों का
आधार व्यक्तिगत सुविधायें।
या भाव रहित भौतिकता है
या किसिम किसिम की दुविधायें।
नफरत का कोई भविष्य नही
दीवार एक दिन ढहनी है।
मन अगर नही उत्सव धर्मी
दुख शोक विलाप रहेगा ही।
श्रदधा की जगह चुनी शंका
बौद्धिक सन्ताप रहेगा ही
फिर प्रेम प्यार का क्या मतलब
जब टीस बराबर रहनी है।
कब तक कोई तन्हा तन्हा
अपने दिल को बहलाएगा।
धीरे-धीरे खन्डहर होते
महलों मे दीप जलायेगा ।
उस वृक्ष मे कैसे फूल खिले
असुरक्षित जिसकी टहनी है।
इतने रिश्तों का क्या मतलब
जब पीर अकेले सहनी है ।
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| सृष्टि कुमार श्रीवास्तव |
सृष्टि कुमार श्रीवास्तव


हिंदी काव्य की बहुत सुंदर कविता
जवाब देंहटाएंBeautiful and motivational poetry thanks to poet
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