happy birthday poem in hindi
जन्मदिन
पचहत्तरवां जन्म दिन
मनाया गया कल अपने
गांव के शिवपूजन दादा का
खाना खिलाया गया
पूरे गांव के लोगों को
गांव के विश्वनाथ
हरिनाथ, कालीचरण
सब दादा के जवानी की
कहानी कह रहे थे
दादा बड़े चाव से उनकी
ज़ुबानी सुन रहे थे
दादा सबकी
बातों में
रमे हुए थे
लेकिन भीतर से कुछ
सहमे हुए थे
दादी सत्तर में ही
स्वर्ग सिधार गई
निगाहें आज दादी
की तलाश में थी उनकी
दादी नहीं पास थी
पितृ -भक्ति का
शंखनाद किया पूरे गांव में
बेटों ने यह जन्म दिन मनाकर
सारा रहस्य जानते थे
दादा इसके पीछे का
बच्चे और बहू उनको
बोझ मानते थे
अपने दिल के चश्मे से
मक्कारियों की उनकी किताब
को खूब अच्छी तरह
पढ़ा था दादा ने
कितने दु:ख में दादी ने
इन्हें गढ़ा था
बच्चों के निर्माण हेतु
बहाए गए रक्त
अर्थहीन हो गए
टूटे हुए थे दादा आज
परिवार से रुठे हुए थे
उत्सव के केंद्रबिंदु
होते हुए भी
अपनों से रिक्त थे
दादी की याद में
आंसुओं
से सिक्त थे
दादा का शरीर
ठंडा पड़ गया सुबह ही
वरण कर लिया
मृत्यु सुंदरी को आज उन्होंने
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| डॉ०सम्पूर्णानंद मिश्र |
डॉ०सम्पूर्णानंद मिश्र
फूलपुर प्रयागराज
7458994874


जन्मदिन पर पूजन करना परंपरा गाँव तक सीमित होता जा रहा है मिश्र सर की कविता समाज को जगाने वाली है धन्यबाद सर
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