Love zihad par kavita
डॉ.संपूर्णानंद मिश्र
चाहिए इंसाफ़
होना चाहिए
परिवर्तन एक सीमा तक
चाहे वह सामाजिक परिवर्तन
हो या वैचारिक परिवर्तन
सृष्टि का शाश्वत नियम भी है परिवर्तन
इसी के नियामक हैं
अंधकार और प्रकाश भी
दिन और रात भी
सूर्य और चांद भी
जब मज़हबी रंग में
परिवर्तन के परिधान
को डूबो दिया जाता है
तो वह घातक सिद्ध हो जाता है
देश एवं समाज के लिए
गुज़र रहा है
देश भी हमारा इसी दौर में
सबसे ज़्यादा
झुलसा रही है हमारी बेटियों को
बचाना होगा उन्हें
इस आंच से
झोंक देना चाहते हैं
इस धर्म परिवर्तन की आग में
भोली- भाली बेटियों को
ताकि मिटा सके
अपनी वासनात्मक भूख़
लव जेहाद के नाम पर
क्योंकि बिल्कुल
नहीं हो सकता
प्रेम का मार्ग
इतना घृणित और विकराल
जिसकी लपट में
जलती और मरती रहें
देश की बेटियां
आज चाहिए उन्हें इंसाफ़
संपूर्णानंद मिश्र
प्रयागराज फूलपुर
हमें विश्वास है कि हमारे लेखक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस वरिष्ठ सम्मानित लेखक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।लेखक की बिना आज्ञा के रचना को पुनः प्रकाशित’ करना क़ानूनी अपराध है |आपकी रचनात्मकता को हिंदीरचनाकार देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए help@hindirachnakar.in सम्पर्क कर सकते है|whatsapp के माद्यम से रचना भेजने के लिए 91 94540 02444, संपर्क कर कर सकते है।
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| डॉ.संपूर्णानंद मिश्र |
चाहिए इंसाफ़
होना चाहिए
परिवर्तन एक सीमा तक
चाहे वह सामाजिक परिवर्तन
हो या वैचारिक परिवर्तन
सृष्टि का शाश्वत नियम भी है परिवर्तन
इसी के नियामक हैं
अंधकार और प्रकाश भी
दिन और रात भी
सूर्य और चांद भी
जब मज़हबी रंग में
परिवर्तन के परिधान
को डूबो दिया जाता है
तो वह घातक सिद्ध हो जाता है
देश एवं समाज के लिए
गुज़र रहा है
देश भी हमारा इसी दौर में
सबसे ज़्यादा
झुलसा रही है हमारी बेटियों को
बचाना होगा उन्हें
इस आंच से
झोंक देना चाहते हैं
इस धर्म परिवर्तन की आग में
भोली- भाली बेटियों को
ताकि मिटा सके
अपनी वासनात्मक भूख़
लव जेहाद के नाम पर
क्योंकि बिल्कुल
नहीं हो सकता
प्रेम का मार्ग
इतना घृणित और विकराल
जिसकी लपट में
जलती और मरती रहें
देश की बेटियां
आज चाहिए उन्हें इंसाफ़
संपूर्णानंद मिश्र
प्रयागराज फूलपुर
हमें विश्वास है कि हमारे लेखक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस वरिष्ठ सम्मानित लेखक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।लेखक की बिना आज्ञा के रचना को पुनः प्रकाशित’ करना क़ानूनी अपराध है |आपकी रचनात्मकता को हिंदीरचनाकार देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए help@hindirachnakar.in सम्पर्क कर सकते है|whatsapp के माद्यम से रचना भेजने के लिए 91 94540 02444, संपर्क कर कर सकते है।
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