मंगलवार, 3 नवंबर 2020

bhrashtaachaar aapan adhikaar-अखिलेश प्रताप सिंह

bhrashtaachaar aapan adhikaar


भ्रष्टाचार आपन अधिकार



“चाहे आवै मोदी, चाहे आवै गाँधी”

मूंछ मिरोरत साहब बोलै,

आपन सदा है, चाँदी ॥    

“चाहे आवै मोदी, चाहे आवै गाँधी”
बिन पेंदी के, हम हइन लोटा,

जान लो, दिलबर जानी ॥
 
“चाहे आवै मोदी, चाहे आवै गाँधी”
बिन “कौरा”, इक काम न होई,

गांठ बांध लेव, जानी ॥ 

 “चाहे आवै मोदी, चाहे आवै गाँधी”

चाहे हो वै, जेह की सरकार,

भ्रम न, पालो जानी,
भ्रष्टाचार पे, आपन अधिकार ॥

मान लो, दिलबर जानी ॥ 
“चाहे आवै मोदी, चाहे आवै गाँधी”

अखिलेश प्रताप सिंह(रवि)

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