bhrashtaachaar aapan adhikaar
भ्रष्टाचार आपन अधिकार
“चाहे आवै मोदी, चाहे आवै गाँधी”
मूंछ मिरोरत साहब बोलै,
आपन सदा है, चाँदी ॥
“चाहे आवै मोदी, चाहे आवै गाँधी”
बिन पेंदी के, हम हइन लोटा,
जान लो, दिलबर जानी ॥
“चाहे आवै मोदी, चाहे आवै गाँधी”
बिन “कौरा”, इक काम न होई,
गांठ बांध लेव, जानी ॥
“चाहे आवै मोदी, चाहे आवै गाँधी”
चाहे हो वै, जेह की सरकार,
भ्रम न, पालो जानी,
भ्रष्टाचार पे, आपन अधिकार ॥
मान लो, दिलबर जानी ॥
“चाहे आवै मोदी, चाहे आवै गाँधी”
अखिलेश प्रताप सिंह(रवि)
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