शनिवार, 31 अक्टूबर 2020

सुनहरी भोर की ओर '(कविता संग्रह) की पाण्डुलिपि के पूजन के साथ काव्य गोष्ठी सम्पन्न ।

 'सुनहरी भोर की ओर '(कविता संग्रह) की पाण्डुलिपि के पूजन के साथ काव्य गोष्ठी सम्पन्न ।

सुनहरी -भोर -की -ओर '-(कविता संग्रह) -की -पाण्डुलिपि -के -पूजन -के- साथ -काव्य- गोष्ठी- सम्पन्न ।
कविता संग्रह के प्रकाशनार्थ डॉ रसिक किशोर सिंह नीरज को अंग वस्त्र ,दस हजार रुपये का चेक और पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया ।


आज दिनांक 30/10/2020 को शरद पूर्णिमा एवम् महर्षि वाल्मीकि जयन्ती के पावन अवसर पर कलेक्ट्रेट प्रॉगण ,रायबरेली में वरिष्ठ कवि डॉ रसिक किशोर सिंह नीरज जी की कविता संग्रह 'सुनहरी भोर की ओर ' की पाण्डुलिपि का पूजन मॉ वीणा वादिनी के सूक्ष्म संरक्षण और सुकवि शिव कुमार शिव ,आचार्य सूर्य प्रसाद शर्मा निशिहर ,दुर्गा शंकर वर्मा दुर्गेश , हरिश्चंद्र त्रिपाठी हरीश ,डॉ रसिककिशोर सिंह नीरज,एवम् प्रदीप त्रिवेदी दीप तथा अंगद प्रसाद त्रिवेदी आदि की पावन उपस्थिति में सायं कालीन काव्य-गोष्ठी के रूप में सोल्लास सम्पन्न हुई ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सुकवि शिव कुमार शिव तथा मुख्य अतिथि का दायित्व निर्वाह आचार्य सूर्यप्रसाद शर्मा निशिहर जी ने किया । कार्यक्रम का सफल संचालन हरिश्चंद्र त्रिपाठी हरीश द्वारा किया गया ।

काव्य गोष्ठी का शुभारंभ सुकवि दुर्गा शंकर वर्मा दुर्गेश की पंक्ति--

'झंकृत कर मॉ ,मन वीणा के तार हमारे ' से हुआ ।

प्रदीप त्रिवेदी दीप ने --'दीप जलता है अंधेरी घाटियों में ' का सुन्दर प्रस्तुतिकरण किया । राजनेताओं पर करारा व्यंग्य प्रहार किया । निशिहर जी ने सामाजिक गतिविधियों पर सुन्दर रचनाओं का पाठ करते हुए कहा-'

संकटों से सभी उबर जायें ,

जो भी नीचे पड़े ऊपर आयें ।'

हरिश्चंद्र त्रिपाठी हरीश ने काव्यात्मक संचालन करते हुए 'पिता 'शीर्षक व जल संरक्षण से सम्बन्धित सुन्दर बाल रचना का पाठ करते हुए कहा -

जल ही जीवन,कहते लोग, 

दूषित जल से बढ़ते रोग। 


 नल की टोंटी खुली न छोड़ें, 

खुश हाली से नाता जोड़ें ।


पानी की है अमर कहानी, 

गंगा, यमुना हैं वरदानी।


आसमान में बादल आते, 

धरती पर पानी बरसाते। 


अब हाथ जोड़ विनती यह मेरी, 

करें न जल संरक्षण में देरी।'


क्रम को आगे बढ़ाते हुए डॉ. नीरज ने--

'हो गये जो समर्पित वतन के लिए ,

उनके इतिहास हैं आचरन के लिए ।'

पढ़ कर काव्य की धारा को मोड़ दिया । 

दुर्गेश जी ने --

सो जा सो जा बिटिया रानी ' लोरी गीत  पूरे तरन्नुम में प्रस्तुत किया। अध्यक्ष शिव कुमार शिव जी ने चन्द्रमा के षोडश कला निरूपण पर बोलते हुए महर्षि वाल्मीकि के देश,काल,परिस्थितियों पर भी व्यापक प्रकाश  डाला ।

अन्त में कविता संग्रह के प्रकाशनार्थ डॉ रसिक किशोर सिंह नीरज को अंग वस्त्र ,दस हजार रुपये का चेक और पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया ।

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