गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020

राजेन्द्र बहादुर सिंह राजन के नवगीत

 राजेन्द्र  बहादुर  सिंह राजन के नवगीत 

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राजेन्द्र  बहादुर  सिंह 

बिम्बों में आज

बिम्बों में आज

 

सजता

नवगीत, गजल

बिम्बों में आज

ज्यादातर

जूठे हैं

बिम्ब प्रतीक

परंपरा से हटकर

लेखन के लीक

हर दीपक

को अपनी

क्षमता पर नाज

अमलतास

या फिर हो

बरगद का पेड़

हर कोई दिखलाये

अपनी ही ऐंड

कैक्टस

आये

करतूतों से बाज

भादो में

सरि लिखती

बैशाखी गीत

कलियों के शोषण को

अलि कहते प्रीत

संवेदन

है विहीन

लुप्त लोकलाज

विघटन, संत्रास

घुटन

बस यही यथार्थ

इससे

उबरो,पाओ

सच्चा परमार्थ

कौन हरे

इस युग का

कोढ़ और खाज?

राजेंद्र बहादुर सिंह "राजन"

वरिष्ठ साहित्यकार रायबरेली 

 


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