शनिवार, 17 अक्टूबर 2020

navratri kavita hindi- नमन शैलजा अम्ब

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 नमन शैलजा अम्ब

नमन शैलजा अम्ब


प्रथम नमन नवरात्रि का,नमन शैलजा अम्ब,

दौड़ अविद्या नष्ट कर, हे माता अविलम्ब।


चित्त तमिस्रा से घिरा,गिरा भवानी देख,

कृपा रश्मि से रक्ष तू,भर कर एक सुरेख।


कल्पनेश जग जानता, सचमुच अच्छे संत,

भरी कलुषता पर हृदय, लख ले यहाँ अनंत।


कृपा कोर कर रंच भर, कर दे इसका अंत,

तू माता तू इष्ट है,तू ही जीवन कंत।


चंड-मुड की घातिनी,रक्त बीज कर पान,

रक्षा तूने ही किया, दिया अभय का दान।


सकल देवता भक्त जन,करते स्तुति गान,

यह उर जब पीड़ित हुआ, आया तब तव ध्यान।


मैं सुत तू है अम्बिका,दे आँचल का छाँव,

उर पुर में महिमा जगे,जागृत  हो यह गाँव।


हृदय कमल दल दे रहा,पूजा हो स्वीकार,

रिपु दल मस्तक छिन्न हो,कर धनु कर टंकार।


सिंह वाहिनी अंबिका, दे विद्या का दान,

जगत द्वंद सब दूर हो,हो तव महिमा गान।


बाबा कल्पनेश

 


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