शनिवार, 17 अक्टूबर 2020

राष्ट्रीय वेदना हिंदी कविता -सीता राम चौहान पथिक

  राष्ट्रीय - वेदना हिंदी कविता -सीता राम चौहान पथिक

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राष्ट्रीय - वेदना हिंदी कविता

 राष्ट्रीय - वेदना । 


भारत    मेरा  देश है, मेरे जीवन का सार ।
भगवन मेरे देश को, देना शक्ति अपार ।। 

भारतीय सब हों यहां, जाति धर्म से मुक्त ।
राष्ट्रीयता एक हो , स्वाभिमान सम्पुष्ट ।। 

ऐसा       मेरा   देश   हो , जिएं   सभी  पर - हेत ।
सभी पड़ोसी शान्ति -प्रिय , प्रभु देना उन्हें विवेक ।। 

राजनीति है भ्रष्टतम --जन -प्रतिनिधि निकॄष्ट । 
मेधा - शोधन करो प्रभु , हो देश -भक्त उत्कृष्ट ।। 

पाश्चात्य संस्कृति में  , भूले  हम स्वर्ण - अतीत । 
पश्चिम शिक्षा ग्रहण कर , हम होते दास प्रतीत ।। 

प्रभु   मेरे  इस  देश  में , राम - राज्य  युग  लाओ ।
अप - संस्कृति संक्रमण से , पीड़ित यह देश बचाओ ।। 

नहीं स्व - भाषा का अहम , निज भाषा से ग्लानि । 
जहां राष्ट्र - भाषा नहीं , गूंगा है वह  यह जानि ।। 

कर्ण   धार  इस  देश  के ,  हैं पश्चिम की देन ।
भारतीय संस्कृति से ,  उनका लेन - ना - देन ।। 

खंड - खंड भारत हुआ ,  था अखंड यह देश । 
तार - तार हुई एकता  ,  देख विभीषण - क्लेश ।।

जागो भारत - भारती , तुम पर है विश्वास । 
अग्नि परीक्षा का समय , तुम भारत की आस ।।

विनती है प्रभु आपसे , - - तुम ही करो उपाय । 
कर्ण धार जन -प्रिय हों , सेवक नम्र सुभाय ।। 

रक्षा - कवच अभेध्य हो , शक्तिशाली हो देश । 
आतंकी साया ना हो  , पथिक शान्ति  सन्देश ।। 


       सीता राम चौहान पथिक


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