शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

mai akela chal pada-डॉ भगवान प्रसाद उपाध्याय

 mai akela chal pada-डॉ भगवान प्रसाद उपाध्याय

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डॉ भगवान प्रसाद उपाध्याय

 

मैं अकेला चल पड़ा हूं

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युग   बदलने   कर्म  पथ  पर

मैं  अकेला    चल   पड़ा   हूं

सत्य   का    संकल्प   लेकर

अटल अविचल  बन खड़ा हूं

 

काल - गति ने कब किसी को

स्वच्छंद   यूं  बहने   दिया   है

प्रकृति   ने भी   निज रूप को

कब  एक  सा रहने   दिया  है

 

मैं अकिंचन   अनुगमन   कर

ले  उसी   का ध्वज   बढ़ा  हूं

युग   बदलने   कर्म  पथ पर

मैं    अकेला   चल   पड़ा हूं

 

मार्ग   बाधित   है  बहुत   ही

किंतु   रुकना   संभव नहीं है

निज  लक्ष्य   को पाये  बिना

पीछे मुड़ें   ये  संभव   नहीं है

 

शत्रु दल की  नियति दूषित

किंतु   मैं    निर्भय  बढ़ा हूं

युग  बदलने  कर्म पथ   पर

मैं   अकेला   चल  पड़ा हूं

 

बीत रागी  बन   सको    तो

साथ   तुम भी   चल सकोगे

मातृ भू  की   वंदना में निज

शीश   अर्पित   कर  सकोगे

 

बस राष्ट्र वैभव की  अमरता

के लिए   प्रतिपल   अड़ा  हूं

युग  बदलने   कर्म पथ   पर

मैं अकेला   चल   पड़ा   हूं

 

डॉ भगवान प्रसाद उपाध्याय

 


 

 




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