रविवार, 25 अक्टूबर 2020

maa par ek aatm chintan-- डॉ. दया शंकर पाण्डेय

maa- par- ek- aatm- chintan
 डॉ. दया शंकर पाण्डेय

 

माँ पर एक आत्म चिन्तन



आँचल  से माँ   के
जीवन का प्रारम्भ,


बकँईयाँ से खड़े  होने तक  का    सफ़र,
 उठते गिरते घाव का वह क्षणिक असर,


आँचल से तोपी हुयी अटूट स्नेह की
 वह     दुधमुंही       खिलखिलाहट,


पोतनी मिट्टी से पुती हुई भित्ति से
माथे  का   अनजाने में     भिड़ना, 


 माँ   की     ममता    का
उस गुरम्हे पर  गरमा कर
कड़ू   तेल  से     सहलाना,


माँ  की   ममता      का 
वह अचूक  शुभचिन्हक,


कोठरी   में        बैठकर 
याद कर ऐसा लगता है,
मानो जीवन बेपर हो चला है,

आज     कहाँ       है      वह
 माँ के बुकवे से सनी कटोरी,


कहाँ है मीजने के बाद बोरे पर
सुलाने का वह  नरम     हाथ
 जीवन पल छिन ढूँढेगा
 माँ   तेरे  ममत्व    को,


यह जीवन उससे कभी नहीं
अघायेगा  माँ   कभी नहीं !


डॉ. दया शंकर पाण्डेय

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