Dussehra hindi poetry
दशहरा का त्योहार सदा,
देता हम सबको ये सीख।
झूठ और अन्याय छोड़,
करें सत्य से प्रीत॥
कितनी भी दुस्वारियाँ हों,
पर हो सच्चाई का पथ।
नही दें कभी कष्ट किसी को,
स्नेह भरा हो रथ॥
छल-दंभ-द्वेष-पाखंड-झूठ,
येथी रावण की पहचान।
विजयादशमी के दिन टूट गया,
रावण का अभिमान॥
राम सनातन सत्य है,
राम ही हैं अनुराग।
आज के पावन-पर्व पर,
करें सत्य से प्यार॥
असत्य से सत्य की,
बुराई से अच्छाई की
कभी न होती प्रीत।
रावण पर राम की,
अंधकार पर प्रकाश की
सदा हुई है जीत।।
सीता संग राम पधारे,
अयोध्या हुई निहाल।
विजयादशमी-दीपावली पर्व मनायें,
सभी रहें खुशहाल।।
अभिवेक श्रीवास्तव
प्रवक्ता,डायट-रायबरेली

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
सभी साथियों से अनुरोध है कि यदि आपकी मातृभाषा हिंदी है,
तो यहाँ अपनी टिप्पणी भी हिंदी (देवनागरी लिपि)
में ही प्रकाशित करने की कृपा कीजिए!
टिप्पणी पोस्ट करने से पहले
ई-मेल के द्वारा सदस्यता ले लिया कीजिए,
ताकि आपकी टिप्पणी प्रकाशित होने के बाद में यहाँ होनेवाली चर्चा का पता भी आपको चलता रहे और आप बराबर चर्चा में शामिल रह सकें!