रविवार, 25 अक्टूबर 2020

Dussehra hindi poetry-दशहरा पर कविता

 Dussehra hindi poetry

Dussehera-hindi-poetry
अभिवेक श्रीवास्तव

दशहरा का त्योहार सदा,
देता हम सबको ये सीख।

झूठ और अन्याय छोड़,
करें   सत्य   से  प्रीत॥

कितनी भी दुस्वारियाँ हों,
पर हो सच्चाई का  पथ।

नही दें कभी कष्ट किसी को,
स्नेह      भरा     हो     रथ॥

छल-दंभ-द्वेष-पाखंड-झूठ,
येथी रावण की   पहचान।

विजयादशमी के दिन टूट गया,
रावण     का         अभिमान॥

राम सनातन सत्य है,
राम ही हैं   अनुराग।

आज के पावन-पर्व पर,
करें   सत्य  से   प्यार॥

असत्य से सत्य की,
बुराई से अच्छाई की 
कभी न होती  प्रीत।

रावण   पर   राम   की,
अंधकार पर प्रकाश की
 सदा   हुई  है     जीत।।

सीता संग राम पधारे,
अयोध्या हुई निहाल।

विजयादशमी-दीपावली पर्व मनायें,
सभी         रहें             खुशहाल।।




अभिवेक श्रीवास्तव
प्रवक्ता,डायट-रायबरेली

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