" अंग्रेजी के अल्पज्ञान ने हिंदी को पंगु बना दिया है।" - असिस्टेंट प्रोफेसर, चीफ प्रॉक्टर अशोक कुमार गौतम|'हिंदी रचनाकार' वेबसाइट जीवन परिचय,
तकनीकी युग में 'हिंदी रचनाकार' वेबसाइट
ने हिंदी को विश्वपटल पर स्थापित करने वीणा उठाया है, निश्चित रूप से
सार्थक पहल है। हिंदी भाषी लोग सम्पूर्ण विश्व में मिलते हैं जिन्हें
मातृभाषा पर गर्व है। धार्मिक वैमनस्य और पब्लिक स्कूलों में अंग्रेजी के
प्रति झूठे झुकाव के कारण हिंदी का महत्व कम होने लगा है। हम भूल जाते हैं
कि यदि हिंदी माँ है तो उर्दू मौसी। हमें यह याद रखना चाहिये कि हिंदी
दिलों को जोड़ने वाली भाषा है, तो अंग्रेजी सिर्फ व्यापारिक भाषा है।
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| असिस्टेंट प्रोफेसर, चीफ प्रॉक्टर अशोक कुमार गौतम |
असिस्टेंट प्रोफेसर, चीफ प्रॉक्टर अशोक कुमार गौतम बताते हैं कि प्रवासी
हिंदी लेखन, रामचरित मानस, सन्त साहित्य, डिजिटल इंडिया, स्त्री विमर्श जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय लंदन, मॉरीशस आदि देशों
से 10 अंतरराष्ट्रीय आलेख, 15 राष्ट्रीय आलेख, अवध-केसरी जैसी महत्वपूर्ण
पत्रिकाओं में 15 लेख प्रकाशित हो चुके हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय 80
वेबनॉरों में प्रतिभाग के साथ अपने विचार प्रस्तुत किया है। जिनका प्रमुख
उद्देश्य हिंदी को दलों में नहीं, दिलों में बैठाना है।
अशोक
कुमार हिंदी के सजग प्रहरी हैं जिसे देखते हुए कलमकार सम्मान, अरविंदो
सोसायटी नई दिल्ली द्वारा टीचर इनोवेशन अवार्ड प्रदान किया गया। मतदाताओं
को जागरूक करने के लिए जिलाधिकारी रायबरेली द्वारा 2017 में प्रशस्ति पत्र
प्रदान किया गया है।
अंत में अशोक कुमार गौतम कहते हैं कि " अंग्रेजी के अल्पज्ञान ने हिंदी को पंगु बना दिया है।"

अति उत्तम
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