Dr.Vaishali chandra ki kavita-हिंदीं कविता

ङाॅ॰ वैशाली चन्द्रा

हिंदीं कविता
( 1.)
लोगों ने कहा
घर से वक़्त -बेवक़्त
बाहर ना निकला करो
जां को बाहर की हवा से खतरा है|
सँभालकर रखो
आँचल अपना कि उसके सरकने से
दूसरों की नीयत बिगड़ने का खतरा है|
और सबसे जरुरी घुड़की
औरत को कि बंद रखे जुबां अपनी
उसकी जुबां से पूरी दुनिया को खतरा
है !!!
(2)
कहाँ पता था
किसी को कि
एक समय
समय इतना बदल जाएगा
कि गुनाहगारों का
हर गुनाह माफ़ हो जाएगा।
साफ़ कपड़ों के अलावा
जीवन में कुछ साफ न रह जाएगा!
(3)
अक्सर
हर बार
गुंथने लगता है मन मेरा
चमकीली नहीं
उदास आँखों से !
(4)
लंबे ज्वर से उठने के बाद वह
नींबू के टुकड़े को कसकर
निचोड़ रही है दाल पे
कि रुच जाए थोड़ा खाना
या ढूँढ रही है वह जिंदगी में स्वाद
एक नींबू के सहारे!
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