पुष्प हिंदीं कविता
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| अरविंद कुमार |
पुष्प हिंदीं कविता
आरती के थाल में सजता रहा,
गुनगुनाती धूप में खिलता रहा,
कंटकों के बीच रहकर मुस्करा,
पवन के संग संग रहकर घुलघुला,
प्रियतमा के मिलन का साक्षी रहा,
बन गले का हार मैं पड़ता रहा,
आरती के थाल में सजता रहा,
पुष्प हूँ मैं प्रेम मय जीवन मेरा,
झाड़ियों में क्यारियों में खिलखिला,
प्रेरणा अरविंद मैं देता सदा,
टूटकर भी प्रेम वर्षाता रहा
आरती के थाल में सजता रहा|

So beautiful poem
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