शुक्रवार, 18 सितंबर 2020

Bharat ki pehachan hai hindi- भारत की पहचान है हिंदी-डॉ. रसिक किशोर सिंह 'नीरज'

 

भारत की पहचान है हिंदी

भरत भूमि की शान है हिंदी

भारत की पहचान है हिन्दी।

 

जन-जन की यह मधुमय वाणी

सुरसरि सम हितकर कल्याणी

माँ है माँ का मान है हिंदी

भरत भूमि की शान है हिंदी।

 

एक सूत्र में सबको बाँधे

एक ईष्ट यह, सब आराधे

नैतिकता का ज्ञान है हिन्दी

भरत भूमि की शान है हिंदी।

 

गत वैभव की अमिट कहानी

सौम्य सुघर सुंदर वरदानी

संस्कृति का अभिमान है हिंदी

भरत भूमि की शान है हिंदी।

 

विषपायी मीरा की प्यारी

भारतेन्दु की राजदुलारी

कवियों की मृदुगान है हिंदी

भरत भूमि की शान है हिंदी।

 

कबिरा की यह अटपट बानी

तुलसी की है राम कहानी

मानस का तन प्राण है हिंदी

भरत भूमि की शान है हिंदी।

 

नागमती की विरह  वेदना

राधा की है प्रणय साधना

केशव का गुणगान हैं हिंदी

भरत भूमि की शान है हिन्दी।

 

नीर भरी यह दुख की बदली

पीर भरी "आंसू" में मचली 

परिवर्तन  का भान है हिंदी

भरत भूमि की शान है हिंदी।

 

सरस्वती सम बहे त्रिवेणी

भारत माँ की अनुपम बेणी

रहिमन रसखान है हिन्दी 

भरत भूमि की शान है हिंदी।

 

कभी तोड़ती पथ पर पत्थर

चलती कभी लकुटिया लेकर

दीन दुखी का त्राण है हिंदी

भरत भूमि की शान है हिंदी।

 

यशोधरा का पूत नियम है

और उर्मिला का संयम है

कितनी सरल महान है हिंदी

भरत भूमि की शान है हिंदी।

Bharat- ki- pehachan- hai- hindi
डॉ.रसिक किशोर सिंह 'नीरज

डॉ. रसिक किशोर सिंह 'नीरज इस  सुंदर गीत के रचयिता है  कार्य  क्षेत्र- गद्य पद्य नाटक में तथा  लगभग सभी विधाओं में आकाशवाणी, दूरदर्शन से लगभग 40 वर्षों का प्रसारण तथा देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में  रचनाओं का प्रकाशन।

विशेष- पत्र पत्रिकाओं का  संपादन 40 वर्षों का अनुभव ।
 भारत में  विभिन्न  200 अखिल भारतीय कवि सम्मेलनो, राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी  एवं व्याख्यानो में भाग ले चुके हैं।
 अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक सामाजिक  कार्यक्रमों को आयोजित तथा संचालन कर  विभिन्न प्रतिभाओं को सम्मानित कर चुके हैं तथा कई संस्थाओं में संस्थापक पदाधिकारी एवं   संगीतज्ञ।

 

 

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