Hindi poem-'नारी हिन्दुस्तानी'||श्रीमती प्रियंका
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| श्रीमती प्रियंका |
नारी हिन्दुस्तानी
अबला- सबला की हुई कहानी पुरानी,
नये अस्तित्व में आई नारी हिंदुस्तानी,
संघर्षों में जूझती रही नयें गंतव्यों को ढूंढती रही,
राह नहीं आसान कोई करें नया काम कोई,
निभाती घर-बाहर सब की ज़िम्मेदारी ,
सरकारी कर्मचारी हो या घर की रानी,
चाह है, सम्मान की नयें कीर्तिमान की,
बदलते पैमानों पर, है अभिमानों पर,
पीछे न हटना है बस आगे ही बढ़ना है,
हर पल जीवन में रचती नई कहानी,
निडर यह नये जमाने की मर्दानी,
नयें अस्तित्व में आई नारी हिन्दुस्तानी।
श्रीमती प्रियंका
असिस्टेंट प्रोफेसर

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